दिल्ली लक्ष्मी योजना में सांसद-विधायक की सिफारिश अनिवार्य करने को हाईकोर्ट में चुनौती, 2500 रुपये मासिक सहायता का मामला

Amir Ahmad

2 Sept 2026 5:30 PM IST

  • दिल्ली लक्ष्मी योजना में सांसद-विधायक की सिफारिश अनिवार्य करने को हाईकोर्ट में चुनौती, 2500 रुपये मासिक सहायता का मामला

    दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये की आर्थिक सहायता पाने के लिए सांसद या विधायक से अनुशंसा पत्र लेना अनिवार्य किए जाने को दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका के जरिये चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि किसी कल्याणकारी योजना का लाभ लेने के लिए राजनीतिक सिफारिश को अनिवार्य शर्त बनाना पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण व्यवस्था के अनुरूप नहीं है।

    चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने इस याचिका को इसी मुद्दे से जुड़ी एक अन्य याचिका के साथ जोड़ दिया। उस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होनी है। फिलहाल अदालत ने संबंधित अधिकारियों को याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

    यह जनहित याचिका एडवोकेट शबाना हुसैन ने दायर की। इसमें मांग की गई कि दिल्ली लक्ष्मी योजना को सांसद या विधायक के अनुशंसा पत्र पर निर्भर रखने के बजाय ऐसी व्यवस्था के जरिये लागू किया जाए, जो वस्तुनिष्ठ, पारदर्शी, सुगम और भेदभाव रहित हो।

    याचिका के मुताबिक योजना में पात्र लाभार्थी महिला को संबंधित सांसद या विधायक से अनुशंसा या सिफारिश पत्र लेना होगा और उसे पंजीकरण पोर्टल पर अपलोड करना होगा। याचिकाकर्ता का कहना है कि योजना में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि सांसद या विधायक किसी महिला को अनुशंसा पत्र देने या मना करने के लिए किन वस्तुनिष्ठ मानदंडों का पालन करेंगे। इसके अलावा, ऐसे फैसले के खिलाफ किसी समीक्षा व्यवस्था का भी प्रावधान नहीं है।

    याचिका में कहा गया कि इस शर्त से राज्य और कल्याणकारी योजना के लाभार्थियों के बीच एक ऐसी राजनीतिक कड़ी बन जाती है, जिसमें स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अभाव है। इससे समान रूप से पात्र महिलाओं के साथ अलग-अलग व्यवहार की स्थिति पैदा हो सकती है। किसी महिला को योजना का लाभ केवल इसलिए नहीं मिलना चाहिए कि वह सांसद या विधायक से अनुशंसा पत्र हासिल करने में सक्षम नहीं है।

    याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं की परेशानियों का भी उल्लेख किया। उसके अनुसार, सांसद या विधायक के कार्यालयों के चक्कर लगाने, दस्तावेजों की छपाई, साइबर कैफे और स्कैनिंग पर खर्च करने, काम से छुट्टी लेने के कारण मजदूरी का नुकसान होने तथा बिचौलियों पर निर्भर रहने जैसी समस्याएं इस अनिवार्य शर्त के कारण पैदा हो सकती हैं।

    इससे पहले इसी मुद्दे पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि योजना में सांसद या विधायक की सिफारिश को अनिवार्य करने के पीछे वह कौन सा उद्देश्य हासिल करना चाहती है। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि सांसद या विधायक की सिफारिश लाभार्थियों के लिए उपलब्ध विकल्पों में से केवल एक होती तो स्थिति अलग होती, लेकिन समस्या यह है कि योजना का लाभ लेने के लिए यही एकमात्र रास्ता बनाया गया।

    अब नई जनहित याचिका पर अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा।

    मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

    अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

    Next Story