इंस्टाग्राम के कथित कॉपीराइट स्ट्राइक वसूली गिरोह पर सुनवाई से जस्टिस तेजस करिया हुए अलग, अब 28 जुलाई को होगी सुनवाई

Amir Ahmad

15 July 2026 6:52 PM IST

  • इंस्टाग्राम के कथित कॉपीराइट स्ट्राइक वसूली गिरोह पर सुनवाई से जस्टिस तेजस करिया हुए अलग, अब 28 जुलाई को होगी सुनवाई

    दिल्ली हाईकोर्ट में इंस्टाग्राम के कथित कॉपीराइट स्ट्राइक के जरिए वसूली करने वाले संगठित साइबर गिरोह के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से जस्टिस तेजस करिया ने स्वयं को अलग कर लिया।

    अब इस मामले की सुनवाई किसी अन्य पीठ के समक्ष 28 जुलाई को होगी।

    यह जनहित याचिका डिजिटल सामग्री निर्माता नितिन जोशी ने दायर की।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि कुछ संगठित गिरोह इंस्टाग्राम की कॉपीराइट शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग कर फर्जी शिकायतें दर्ज कराते हैं। इसके चलते असली सामग्री निर्माताओं के खाते बिना पूर्व सूचना, स्वतंत्र जांच या मानवीय समीक्षा के निलंबित या बंद कर दिए जाते हैं।

    मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध थी।

    याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता तेजबीर सिंह ने अदालत को बताया कि यह तेजी से उभरता हुआ साइबर अपराध है, जिसमें मेटा के कॉपीराइट प्रवर्तन तंत्र का इस्तेमाल लोगों से धन उगाही के लिए किया जा रहा है।

    हालांकि, सुनवाई के दौरान जस्टिस तेजस करिया ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने इस संबंध में कोई कारण नहीं बताया।

    याचिका में दावा किया गया कि फर्जी कॉपीराइट शिकायतों के आधार पर इंस्टाग्राम का स्वचालित तंत्र वैध खातों को बंद कर देता है। इसके बाद कथित तौर पर गिरोह के सदस्य खाते बहाल कराने या शिकायत वापस लेने के बदले लाखों रुपये की मांग करते हैं।

    नितिन जोशी का कहना है कि उन्होंने इंस्टाग्राम का सबसे बड़ा कॉपीराइट घोटाला शीर्षक से एक वीडियो प्रकाशित कर इस कथित गिरोह का खुलासा किया था। इसके बाद देशभर के कई सामग्री निर्माताओं ने उनसे संपर्क कर फर्जी कॉपीराइट शिकायतों, खाते बंद होने और धन उगाही की कोशिशों से जुड़े साक्ष्य साझा किए।

    याचिका में यह भी कहा गया कि इस वीडियो के प्रकाशित होने के कुछ समय बाद उसी वीडियो को भी कॉपीराइट शिकायत के आधार पर दुनिया भर में अवरुद्ध कर दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस व्यवस्था का कथित तौर पर किस तरह दुरुपयोग किया जा सकता है।

    याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि कथित संगठित साइबर वसूली गिरोह के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच कराई जाए, देश और विदेश में सक्रिय आरोपियों की पहचान की जाए तथा वसूली से प्राप्त धन के स्रोत और लेनदेन की भी जांच हो।

    इसके अलावा केंद्र सरकार को निर्देश देने की भी मांग की गई है कि सोशल मीडिया मंचों के लिए ऐसा नियामक ढांचा तैयार किया जाए, जिसमें कॉपीराइट स्वामित्व का सत्यापन, खाते बंद करने से पहले मानवीय समीक्षा, समयबद्ध अपील की व्यवस्था और गलत तरीके से बंद किए गए खातों को शीघ्र बहाल करने का प्रावधान अनिवार्य हो।

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