दिल्ली हाईकोर्ट में PIL: कंस्ट्रक्शन के कड़े नियम और बिल्डिंग नियमों में प्रशासनिक जवाबदेही की मांग

  • दिल्ली हाईकोर्ट में PIL: कंस्ट्रक्शन के कड़े नियम और बिल्डिंग नियमों में प्रशासनिक जवाबदेही की मांग

    दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में कंस्ट्रक्शन (निर्माण कार्य) के लिए कड़े मानकों और बिल्डिंग नियमों में प्रशासनिक जवाबदेही की मांग की गई।

    इंद्रप्रस्थ रेनेसां ट्रस्ट की ओर से दायर इस याचिका को एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव साम्ब्रे और जस्टिस अरुण भारद्वाज की डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए रखा गया।

    याचिकाकर्ता-ट्रस्ट की वकील ने कहा कि याचिका में अधिकारियों की जवाबदेही और डिजिटल सिस्टम के साथ-साथ एक ऐसे सिस्टम की मांग की गई, जो बचावकारी हो।

    उन्होंने कहा कि यह याचिका अतीत की बार-बार होने वाली घटनाओं को देखते हुए दायर की गई, जिसमें हाल ही में सत्य निकेतन PG बिल्डिंग का गिरना भी शामिल है, जिसमें पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई।

    शुरुआत में कोर्ट ने वकील से पूछा कि इस मुद्दे पर संबंधित कानून क्या है।

    कोर्ट ने वकील से कहा,

    "हम इस बारे में आपकी कानूनी मदद चाहते हैं कि योजना (स्कीम) क्या है, क्या सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट होना चाहिए और प्लानिंग एक्ट के तहत क्या प्रावधान हैं।"

    इसके बाद वकील ने तैयारी करने और प्लानिंग व इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट से संबंधित कानून की स्कीम पर कोर्ट के सामने अपनी बात रखने के लिए कुछ समय मांगा।

    अब इस मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

    कोर्ट ने हाल ही में अधिकारियों से कहा कि वे बिल्डिंग गिरने से प्रभावित छात्रों की जान बचाने के लिए अपनी कोशिशें दोगुनी करें।

    कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया है कि वह इस मुद्दे को अपने सबसे ऊंचे एग्जीक्यूटिव लेवल पर उठाए और इस बात की जांच कराए कि जो इमारतें गिरीं, वे वैध अनुमति से बनी थीं या नहीं।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अगर यह पाया जाता है कि निर्माण वैध अनुमति के बिना किया गया, तो MCD इस चूक के लिए दोषी अधिकारी या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करे।

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