Parliament Security Breach: दिल्ली हाईकोर्ट ने 13 दिसंबर की तारीख चुनने पर सवाल उठाया, 2001 के हमले से बताया लिंक
Shahadat
15 Jan 2026 4:38 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि 2023 के संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में आरोपियों द्वारा 13 दिसंबर की तारीख चुनना, जो 2001 के हमले की तारीख जैसी ही है, महज़ एक इत्तेफ़ाक नहीं हो सकता।
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह की अध्यक्षता वाली डिवीज़न बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी की,
"संसद हमले (2001) मामले की तारीख क्या थी?... वह वही (दिन) था... उन्होंने वही दिन चुना।"
इस बेंच में जस्टिस मधु जैन भी शामिल थीं, जो UAPA मामले में जमानत की मांग करने वाले आरोपी मनोरंजन डी, सागर शर्मा और ललित झा द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने मौखिक रूप से मनोरंजन के वकील से पूछा कि आरोपी संसद में कैसे घुसे, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि आरोपियों ने बेरोज़गारी के मुद्दे को उठाने के लिए विरोध प्रदर्शन किया था।
जब बेंच ने घटना की तारीख के बारे में वकील से सवाल किया तो वकील ने कहा कि दोनों घटनाओं - 2001 के हमले और 2023 के सुरक्षा उल्लंघन - के बीच कोई संबंध नहीं है।
इस पर जस्टिस सिंह ने टिप्पणी की:
"यह महज़ एक इत्तेफ़ाक नहीं हो सकता। 13 दिसंबर महज़ एक इत्तेफ़ाक नहीं हो सकता।"
मनोरंजन के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं है, जो पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। उन्होंने माना कि अगर गुस्सा था भी, तो भी आरोपी द्वारा विरोध का चुना गया तरीका गलत था।
मनोरंजन का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट केके मेनन ने कहा,
"मैं पूरी तरह सहमत हूं कि उनका तरीका गलत था, लेकिन साथ ही जब हम आज़ादी के इतिहास को देखते हैं तो अंग्रेज़ों ने भी लोगों को अनिश्चित काल के लिए जेल में नहीं रखा, खासकर जब आरोप तय नहीं किए गए हों। पिछले दो सालों से, आरोप तय नहीं किए गए और वे (अभियोजन पक्ष) किसी न किसी बहाने से तारीखें ले रहे हैं।"
इसके बाद बेंच ने गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य मामले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ज़िक्र किया, जिसमें आतंकवादी कृत्य की परिभाषा पर विचार किया गया।
कोर्ट ने दोनों पक्षों से उक्त फैसले पर विचार करने और उसके बाद अपनी दलीलें पेश करने को कहा।
अब इस मामले की सुनवाई 2 फरवरी को होगी।
पिछले साल जुलाई में कोऑर्डिनेट बेंच ने सह-आरोपी नीलम आज़ाद और महेश कुमावत को जमानत दी थी। हालांकि, उन्हें कोई भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने या कोई इंटरव्यू देने से रोक दिया गया। कोर्ट ने उन्हें इस घटना से जुड़ी कोई भी बात सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से भी रोक दिया।
2001 के संसद आतंकी हमले की बरसी पर सुरक्षा में बड़ी चूक हुई, जब ज़ीरो आवर चल रहा था, तभी दो लोग पब्लिक गैलरी से लोकसभा चैंबर में कूद गए। दोनों की पहचान सागर शर्मा और मनोरंजन डी. के रूप में हुई।
सोशल मीडिया पर सामने आईं तस्वीरों और वीडियो में दोनों को कैनिस्टर पकड़े हुए देखा गया, जिनसे पीली गैस निकल रही थी। वे नारे भी लगा रहे थे। हालांकि, कुछ सांसदों ने उन्हें काबू कर लिया।
दो अन्य आरोपी, जिनकी पहचान अमोल शिंदे और नीलम आज़ाद के रूप में हुई, उन्होंने भी संसद परिसर के बाहर इसी तरह के कैनिस्टर से रंगीन गैस छिड़की। बताया जा रहा है कि वे "तानाशाही नहीं चलेगी" के नारे लगा रहे थे।
Title: Manoranjan D v. State & other connected matters

