NEET-UG 2026: दिल्ली हाईकोर्ट ने बायोलॉजी के सवाल के लिए NTA की फ़ाइनल आंसर की में दखल देने से इनकार किया
Shahadat
11 Aug 2026 7:46 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को NEET-UG परीक्षा, 2026 की फ़ाइनल आंसर की में दखल देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि जब तक जवाब साफ़ तौर पर गलत न हो, तब तक कोर्ट विषय के विशेषज्ञों के आकलन की जगह अपना आकलन नहीं रख सकता।
जस्टिस जसमीत सिंह ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपने जवाब में बताया कि सभी उम्मीदवारों से प्रोविज़नल आंसर की में दिए गए जवाबों के बारे में जो आपत्तियां मिली थीं, उन्हें विचार और समाधान के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थानों के जाने-माने विषय विशेषज्ञों के एक पैनल के सामने रखा गया।
कोर्ट ने कहा,
"इसलिए फ़ाइनल आंसर की को जाने-माने विषय विशेषज्ञों ने विधिवत मंज़ूरी दी। इस कोर्ट के पास विषय विशेषज्ञों की राय और निष्कर्षों पर फ़ैसला सुनाने की विशेषज्ञता नहीं है और न ही हो सकती है। जब तक विशेषज्ञों द्वारा तय किए गए जवाब साफ़ तौर पर गलत न हों, तब तक हमें उनकी विशेषज्ञ राय को ही मानना होगा।"
जस्टिस सिंह ने 17 साल के NEET उम्मीदवार कुशाग्र मित्तल की याचिका खारिज की, जिन्होंने बायोलॉजी सेक्शन (टेस्ट बुकलेट कोड 80) के सवाल नंबर 150 की आंसर की को चुनौती दी।
3 मई को हुई मूल NEET-UG परीक्षा रद्द होने के बाद मित्तल 21 जून को आयोजित दोबारा परीक्षा में शामिल हुए।
उन्होंने 720 में से 695 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक 65 प्राप्त की। उनका कहना था कि सवाल नंबर 150 के एक से ज़्यादा सही जवाब थे और NTA द्वारा माना गया जवाब वैज्ञानिक रूप से गलत था।
मित्तल ने सही जवाब के तौर पर ऑप्शन 2 चुना था, जबकि NTA ने ऑप्शन 3 को सही जवाब माना। नतीजतन, उनके पांच अंक कट गए - चार अंक सही जवाब के लिए और एक अंक नेगेटिव मार्किंग के कारण।
NTA ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि प्रोविज़नल आंसर की पर आपत्तियों (जिसमें मित्तल की आपत्ति भी शामिल थी) पर राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों के पैनल द्वारा पहले ही विचार किया जा चुका था।
पैनल ने आपत्ति को आधारहीन पाया और इसलिए फ़ाइनल आंसर की में जवाब में कोई बदलाव नहीं किया गया। याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने दोहराया कि परीक्षा की आंसर की (उत्तर कुंजी) की न्यायिक समीक्षा केवल उन्हीं मामलों तक सीमित है, जहां कोई स्पष्ट गलती हो और रिकॉर्ड के आधार पर उत्तर साफ तौर पर गलत साबित हो रहा हो।
कोर्ट ने मित्तल की उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने NTA के विषय विशेषज्ञों के पैनल द्वारा दिए गए उत्तर की सही-गलत जांच करने के लिए विषय विशेषज्ञों की एक नई समिति बनाने का अनुरोध किया।
कोर्ट ने कहा,
"हालांकि, मैं इससे सहमत नहीं हो सकता। इस मामले में प्रश्न पत्र विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जाते हैं। इसके बाद जब प्रोविज़नल आंसर की जारी की जाती है तो उम्मीदवारों से प्राप्त आपत्तियों पर रेस्पॉन्डेंट नंबर 1 के विषय विशेषज्ञों द्वारा विचार और जांच की जाती है।"
कोर्ट ने आगे कहा कि अंतिम आंसर की में बदलाव तभी किया जाता है, जब विषय विशेषज्ञ आपत्तियों की जांच करने के बाद उनमें कोई ठोस आधार पाते हैं।
कोर्ट ने आदेश दिया,
"इस मामले को देखते हुए इसमें कोई संदेह नहीं है कि याचिकाकर्ता एक बेहद होनहार, बुद्धिमान और मेहनती छात्र है, लेकिन ऊपर बताए गए तथ्यों के आधार पर यह कोर्ट उसकी मदद नहीं कर सकता और केवल अपनी सहानुभूति व्यक्त कर सकता है। इसलिए याचिका को लंबित आवेदनों के साथ खारिज किया जाता है।"
Title: KUSHAGRA MITTAL MINOR & ANR v. NATIONAL TESTING AGENCY & ORS


