National Herald: दिल्ली हाईकोर्ट ने AJL को अटैच की गई प्रॉपर्टीज़ को छुड़ाने की कोशिश करने से रोकने से इनकार किया
Shahadat
12 Oct 2026 6:13 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को गांधी परिवार के कंट्रोल वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को नेशनल हेराल्ड मामले में PMLA अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने अपनी अटैच की गई प्रॉपर्टीज़ को छुड़ाने की कोशिश करने से रोकने से इनकार किया।
जस्टिस सचिन दत्ता ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार किया। ED ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कांग्रेस नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था।
एजेंसी की ओर से पेश ASG SV राजू ने कहा कि संबंधित कंपनियां PMLA अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने अटैच की गई प्रॉपर्टीज़ को छुड़ाने के लिए उस आदेश का इस्तेमाल कर रही हैं।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह आज (सोमवार) कोई आदेश पारित नहीं कर रहा है।
बता दें, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' (YIL) नाम की एक प्राइवेट, नॉन-प्रॉफिट कंपनी के ज़रिए AJL को कंट्रोल करते हैं।
ED ने पिछले साल 16 दिसंबर को राउज़ एवेन्यू कोर्ट्स के स्पेशल जज विशाल गोगने द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी।
ट्रायल कोर्ट ने माना था कि ED द्वारा गांधी परिवार के खिलाफ दायर अभियोजन शिकायत कानून के तहत सुनवाई योग्य नहीं है, क्योंकि यह प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' (अनुसूचित अपराध) से संबंधित FIR पर आधारित नहीं है।
कोर्ट ने गौर किया कि मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही FIR पर नहीं, बल्कि डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा CrPC की धारा 200 के तहत दायर एक प्राइवेट शिकायत पर पारित संज्ञान और समनिंग आदेश पर आधारित है।
ED ने राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के अपराध के लिए PMLA, 2002 की धारा 44 और 45 के तहत नई शिकायत दर्ज की थी। यह अपराध PMLA, 2002 की धारा 3 (धारा 70 के साथ पढ़ी जाने वाली) के तहत परिभाषित है और धारा 4 के तहत दंडनीय है।
यह विवाद 'एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड' (AJL) के अधिग्रहण (खरीदने) से जुड़ा है, जो अब बंद हो चुके 'नेशनल हेराल्ड' अखबार की प्रकाशक कंपनी थी।
2010 में 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' (YIL) नाम की एक नई बनी कंपनी ने इंडियन नेशनल कांग्रेस से ₹50 लाख में AJL का कर्ज खरीद लिया।
इसके बाद YIL ने AJL की संपत्तियों का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया, जिनकी कीमत ₹2,000 करोड़ से ज़्यादा थी। YIL में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बड़ी हिस्सेदारी थी, जिसके कारण उन पर आरोप लगे कि उन्होंने AJL की कीमती संपत्तियों पर कब्ज़ा करने के लिए पार्टी के फंड का इस्तेमाल किया।
2014 में शुरू हुई ED की जांच कांग्रेस पार्टी, AJL और YIL के बीच हुए वित्तीय लेन-देन पर केंद्रित है।
एजेंसी का आरोप है कि गांधी परिवार और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने निजी फायदे के लिए AJL की संपत्तियों का गलत इस्तेमाल करने की साजिश रची।
हाल ही में ED ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत AJL से जुड़ी लगभग ₹661 करोड़ की संपत्तियों को अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू की।
Title: ED v. Sonia Gandhi & Anr

