सरकारी स्कूल टीचर के तौर पर भर्ती के लिए ज़रूरी बैचलर डिग्री न होने पर मास्टर डिग्री वाले उम्मीदवार योग्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

Shahadat

17 July 2026 9:48 AM IST

  • सरकारी स्कूल टीचर के तौर पर भर्ती के लिए ज़रूरी बैचलर डिग्री न होने पर मास्टर डिग्री वाले उम्मीदवार योग्य नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि मास्टर डिग्री होने से कोई उम्मीदवार अपने आप उस पद के लिए योग्य नहीं हो जाता, जिसके लिए उसी विषय में बैचलर डिग्री की ज़रूरत हो। [2026 LiveLaw (Del) 660]

    जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की डिवीज़न बेंच ने CAT का आदेश रद्द किया, जिसमें दिल्ली सरकारी स्कूलों में कुछ उम्मीदवारों को डोमेस्टिक साइंस टीचर (TGT) के तौर पर नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।

    कोर्ट ने कहा कि जिन उम्मीदवारों के पास होम साइंस में मास्टर डिग्री के साथ-साथ साधारण BA (पास) डिग्री है, उन्हें भर्ती नियमों के तहत डोमेस्टिक साइंस/होम साइंस में बैचलर डिग्री की योग्यता पूरी करने वाला नहीं माना जा सकता।

    कोर्ट ने कहा,

    "एम्प्लॉयर को यह तय करने का अधिकार है कि उसके द्वारा विज्ञापित नौकरियों के लिए उम्मीदवारों के पास क्या एजुकेशनल क्वालिफिकेशन होनी चाहिए और अदालतों को आम तौर पर इसमें दखल नहीं देना चाहिए।"

    यह मामला दिसंबर 2017 में दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विसेज़ सिलेक्शन बोर्ड (DSSSB) द्वारा डोमेस्टिक साइंस टीचर (TGT) के पद के लिए आवेदन मंगाने वाले विज्ञापन से शुरू हुआ था।

    भर्ती नियमों में किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से डोमेस्टिक साइंस/होम साइंस में बैचलर डिग्री और टीचिंग सब्जेक्ट के तौर पर होम साइंस के साथ बैचलर ऑफ़ एजुकेशन (B.Ed) की डिग्री ज़रूरी थी।

    जिन उम्मीदवारों के पास BA (पास) डिग्री और होम साइंस में मास्टर डिग्री थी, उन्हें शुरू में चुना गया और अपॉइंटमेंट लेटर जारी किए गए। हालांकि, बाद में मार्च 2020 में ये ऑफ़र वापस ले लिए गए, क्योंकि उनके पास ज़रूरी एजुकेशनल क्वालिफिकेशन नहीं थी।

    इससे नाराज़ होकर उम्मीदवार CAT के पास गए, जिसने उनके पक्ष में फ़ैसला सुनाया।

    हाईकोर्ट में दिल्ली सरकार की चुनौती के जवाब में उम्मीदवारों ने तर्क दिया कि होम साइंस में मास्टर डिग्री, ज़रूरी बैचलर डिग्री से ऊंची क्वालिफिकेशन है। इसलिए इसमें निचली क्वालिफिकेशन अपने आप शामिल हो जाती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनके BA कोर्स के दौरान होम साइंस एक विषय के तौर पर पढ़ाया गया, जो योग्यता के लिए काफ़ी होना चाहिए।

    इस तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि BA (पास) डिग्री की तुलना होम साइंस में डेडिकेटेड बैचलर डिग्री से नहीं की जा सकती, भले ही तीनों साल होम साइंस की पढ़ाई की गई हो।

    बेंच ने कहा,

    "हमें पूरा भरोसा है कि डोमेस्टिक साइंस/होम साइंस में बैचलर डिग्री, एक तरह से, उस खास विषय में ऑनर्स डिग्री के बराबर है।"

    बेंच ने यह भी कहा कि एक स्पेशलाइज़्ड डिग्री प्रोग्राम में विषय को जिस गहराई और गंभीरता से पढ़ाया जाता है, वह BA (पास) कोर्स में पढ़ाए जाने के तरीके से काफी अलग है।

    कोर्ट ने आगे कहा कि भर्ती के नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो तय योग्यता की जगह उच्च योग्यता को मानने की इजाज़त दे।

    ज़हूर अहमद राथर बनाम शेख इम्तियाज़ अहमद मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए बेंच ने कहा कि उच्च योग्यता को तभी पर्याप्त माना जा सकता है, जब लागू नियम स्पष्ट रूप से यह बताते हों कि इसके लिए निचली योग्यता का होना ज़रूरी है।

    बेंच ने उन पुराने फैसलों से अलग राय रखी जिनमें खास हालात में उच्च योग्यता को मान्यता दी गई और ज़ोर दिया कि इस मामले का फैसला संबंधित पद के लिए भर्ती नियमों के आधार पर किया जाना चाहिए।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि स्पेशलाइज़्ड डिग्री की ज़रूरत वाले पदों के लिए व्यापक शैक्षिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को मुकाबला करने की इजाज़त देना उन लोगों के साथ नाइंसाफ़ी होगी जिन्होंने अंडरग्रेजुएट स्तर से ही उस विषय में एक खास शैक्षणिक रास्ता चुना था।

    कोर्ट ने कहा,

    "अगर हम उच्च डिग्री को निचली डिग्री की जगह लेने की इजाज़त देते हैं तो जिन उम्मीदवारों ने स्कूल के बाद अपनी पूरी ऊर्जा किसी खास विषय में लगाई... उन्हें कई विषयों के साथ ग्रेजुएशन डिग्री वाले उम्मीदवारों से मुकाबला करना पड़ेगा।"

    बेंच ने आगे कहा कि नियोक्ता स्पेशलाइज़्ड योग्यता पर ज़ोर देकर सही तरीके से "कैच देम यंग" (कम उम्र में ही सही लोगों को चुनना) की नीति अपना सकता है और अदालतों को आम तौर पर भर्ती के ऐसे फैसलों का सम्मान करना चाहिए।

    इसके अनुसार, कोर्ट ने CAT का आदेश रद्द किया और कहा कि प्रतिवादी भर्ती के लिए अयोग्य है।

    Case title: GNCTD v. Manu & Ors.

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