कृषि भवन में स्थित मस्जिद को ध्वस्त करने पर अड़ी केंद्र सरकार, हाईकोर्ट में कहा- 'सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं'

  • कृषि भवन में स्थित मस्जिद को ध्वस्त करने पर अड़ी केंद्र सरकार, हाईकोर्ट में कहा- सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं

    केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि 'सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास मास्टर प्लान' के तहत 'कॉमन सेंट्रल सचिवालय' (CCS) की इमारतों 4 और 5 के पुनर्विकास के लिए, कृषि भवन परिसर में स्थित 'कदीमी मस्जिद' को हटाना आवश्यक है।

    'भूमि और विकास कार्यालय' (L&DO) के माध्यम से दायर स्टेटस रिपोर्ट में केंद्र ने कहा कि यह मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और इसकी देखरेख करने वाली समिति को 1940 में हुए एक समझौते के तहत केवल 'अनुमति-आधारित कब्ज़ा' (Permissive Possession) दिया गया।

    यह स्टेटस रिपोर्ट, कृषि भवन स्थित 'कदीमी मस्जिद' की देखरेख करने वाली समिति द्वारा दायर एक याचिका के जवाब में दाखिल की गई।

    L&DO ने बताया कि यह मस्जिद नई दिल्ली के डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर प्लॉट नंबर 120 पर स्थित है और यह जमीन भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन है।

    स्टेटस रिपोर्ट में इस निर्माण कार्य को 'अत्यधिक राष्ट्रीय महत्व की सार्वजनिक परियोजना' बताया गया। इसमें कहा गया कि मस्जिद अभी परियोजना स्थल पर मौजूद है और काम को पूरा करने के लिए इसे हटाना जरूरी है।

    केंद्र ने यह भी कहा है कि कृषि भवन और सेंट्रल सचिवालय परिसर पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक परिसर हैं, जो केवल सरकारी, प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा कार्यों के लिए समर्पित हैं।

    स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया,

    "केंद्र सरकार के कार्यालय परिसर के भीतर किसी स्थायी धार्मिक ढांचे को स्थापित करना या बनाए रखना, अथवा ऐसी मांग करना, स्वीकार्य नहीं है और यह सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं है।"

    इसमें आगे कहा गया,

    "केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र में स्थित सार्वजनिक भूमि पर किसी भी तरह का स्थायी धार्मिक अधिकार या आरक्षण नहीं थोपा जा सकता।"

    L&DO ने यह भी तर्क दिया कि मस्जिद को हटाने के प्रस्तावित कदम से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिलने वाले किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है।

    केंद्र का तर्क है कि सरकारी जमीन पर जहां केवल 'अनुमति-आधारित व्यवस्था' के तहत कब्ज़ा मिला हो, वहां किसी विशेष स्थान पर ही पूजा करने की जिद करने का कोई अधिकार नहीं है।

    केंद्र ने आगे कहा कि इंडिया गेट के पास स्थित शाही मस्जिद ज़ब्ता गंज, कृषि भवन के दो किलोमीटर के दायरे में है और नमाज़ पढ़ने की सुविधा के तौर पर पूरी तरह से काम कर रही है।

    स्टेटस रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि ज़मीन का मालिक होने के नाते, सरकार को कृषि भवन परिसर या सेंट्रल सेक्रेटेरियट कॉम्प्लेक्स के भीतर मस्जिद के लिए अलग जगह आवंटित करने या अलग रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

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