अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी सुनवाई का किया बहिष्कार

Praveen Mishra

28 April 2026 11:56 AM IST

  • अरविंद केजरीवाल के बाद मनीष सिसोदिया ने भी सुनवाई का किया बहिष्कार

    मनीष सिसोदिया ने अरविंद केजरीवाल के बाद दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा है कि वह सीबीआई के लिकर पॉलिसी मामले में आगे की सुनवाई में भाग नहीं लेंगे।

    अपने पत्र में सिसोदिया ने कहा कि वह महात्मा गांधी के सत्याग्रह के सिद्धांत को मानते हैं और उनका अंत:करण उन्हें इस मामले में आगे पेश होने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका यह फैसला केवल आबकारी नीति मामले तक सीमित है और इसे न्यायपालिका के प्रति किसी प्रकार के अविश्वास के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    जस्टिस शर्मा फिलहाल CBI द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिकाओं पर सुनवाई कर रही हैं, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें केजरीवाल, सिसोदिया, संजय सिंह समेत सभी आरोपियों को आरोपमुक्त कर दिया गया था।

    गौरतलब है कि केजरीवाल और सिसोदिया ने पहले जस्टिस शर्मा से खुद को मामले से अलग करने की मांग की थी, जिसमें पक्षपात की आशंका जताई गई थी। हालांकि, जस्टिस शर्मा ने इन याचिकाओं को खारिज कर स्वयं ही मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया।

    अपने पत्र में सिसोदिया ने कहा कि दो बातों ने उन्हें सबसे अधिक चिंतित किया—जस्टिस शर्मा की अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में बार-बार उपस्थिति और उनके बच्चों की केंद्र सरकार के विभिन्न पैनलों में पेशेवर नियुक्तियां। उन्होंने कहा कि वह जज के परिवार की योग्यता पर सवाल नहीं उठा रहे हैं, लेकिन न्यायपालिका में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए केवल निष्पक्षता ही नहीं, बल्कि निष्पक्षता का दिखना भी उतना ही आवश्यक है।

    सिसोदिया ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह कदम न्यायपालिका के खिलाफ नहीं है, बल्कि उनके अंत:करण की आवाज है। उन्होंने कहा कि यदि वह इन परिस्थितियों में भी कार्यवाही में शामिल होते हैं, तो यह उनके सिद्धांतों के विपरीत होगा।

    इससे पहले अरविंद केजरीवाल भी इसी आधार पर सुनवाई का बहिष्कार कर चुके हैं, जिससे यह मामला एक नए कानूनी और संवैधानिक विवाद का विषय बन गया है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story