एयर प्यूरीफायर पर GST रेट तय करना संवैधानिक ढांचे को बिगाड़ देगा: केंद्र ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा
Shahadat
8 Jan 2026 6:51 PM IST

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) का विरोध किया, जिसमें एयर प्यूरीफायर को "मेडिकल डिवाइस" घोषित करने और उन पर 18% GST हटाने की मांग की गई।
अपने हलफनामे में सरकार ने कहा कि GST काउंसिल ही एकमात्र संवैधानिक रूप से नामित संस्था है, जो GST से जुड़े मामलों पर सिफारिशें करती है। ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से अनिवार्य प्रक्रिया को दरकिनार कर देगा।
हलफनामे में कहा गया कि ऐसा हस्तक्षेप भारत के संविधान के अनुच्छेद 279A द्वारा संरक्षित संघीय संतुलन को भी बिगाड़ेगा।
इसमें आगे कहा गया कि GST काउंसिल की बैठक बुलाने का निर्देश देना, या GST काउंसिल को किसी खास नतीजे पर विचार करने या उसे अपनाने के लिए मजबूर करना, कोर्ट के GST काउंसिल की जगह लेने जैसा होगा, "जिससे ऐसे काम होंगे जो संविधान ने जानबूझकर और विशेष रूप से GST काउंसिल को सौंपे हैं।"
बता दें, पहले कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि अधिकारियों को एयर प्यूरीफायर पर GST से छूट देनी चाहिए, क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण की स्थिति एक "आपातकाल" जैसी है।
हलफनामे में कहा गया,
"...यह निवेदन है कि यदि अदालतें GST दरों पर निर्देश जारी करती हैं या विशिष्ट सिफारिशों के लिए मजबूर करती हैं तो GST काउंसिल सिर्फ एक रबर स्टैंप बनकर रह जाएगी, जो संवैधानिक योजना के विपरीत होगा। इसलिए यह निवेदन है कि GST काउंसिल की परामर्श प्रक्रिया का सहारा लिए बिना और सभी सदस्य राज्यों सहित उन सदस्यों की बात सुने बिना, जो किसी प्रस्ताव के मूल कारण से प्रभावित नहीं हैं, अदालत द्वारा अनिवार्य GST दर अनुच्छेद 279A(6) के तहत सामंजस्य के सिद्धांत को कमजोर करेगी और GST ढांचे को बाधित करेगी।"
हलफनामे में आगे कहा गया कि ऐसा करने से शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का भी उल्लंघन होगा, जो संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है, क्योंकि यह कार्यपालिका और विधायिका को स्पष्ट रूप से सौंपे गए वित्तीय और नीतिगत क्षेत्र में हस्तक्षेप करेगा।
केंद्र ने यह भी तर्क दिया कि यह याचिका जनहित की आड़ में नियामक पुनर्वर्गीकरण हासिल करने का एक दिखावटी और प्रेरित प्रयास है।
इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच करेगी।
यह याचिका वकील कपिल मदान ने दायर की। याचिका में कहा गया कि एयर प्यूरीफायर को लग्जरी नहीं बल्कि अत्यधिक वायु प्रदूषण का सामना करने के लिए एक आवश्यकता माना जाना चाहिए। मदन का कहना है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 3(b)(iv) के तहत जारी नोटिफिकेशन के अनुसार एयर प्यूरीफायर मेडिकल डिवाइस की कैटेगरी में आते हैं, क्योंकि वे मैकेनिकल तरीके से खतरनाक पार्टिकुलेट मैटर को फिल्टर करके और हटाकर बचाव का काम करते हैं।
उनका कहना है कि मेडिकल डिवाइस को 5% GST की रियायती दर पर क्लासिफाई करने का कोई तर्कसंगत, वैज्ञानिक या आधार नहीं है, जबकि एयर प्यूरीफायर पर एक साथ 18% टैक्स लगाया जा रहा है, खासकर तब जब ये गंभीर वायु प्रदूषण के समय ज़रूरी बचाव का काम करते हैं।
यह याचिका एडवोकेट गुरमुख सिंह अरोड़ा और राहुल मथारू के ज़रिए दायर की गई।
Title: Kapil Madan v. Union of India & Ors

