नए नियम बनने तक दिल्ली, अंडमान सिविल और पुलिस सर्विस अधिकारियों के लिए 'अप्रूव्ड सर्विस' की तारीख 1 जनवरी होगी: दिल्ली हाईकोर्ट

Shahadat

1 July 2026 7:37 PM IST

  • नए नियम बनने तक दिल्ली, अंडमान सिविल और पुलिस सर्विस अधिकारियों के लिए अप्रूव्ड सर्विस की तारीख 1 जनवरी होगी: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि जब तक नए नियम नहीं बन जाते, तब तक परीक्षा वाले साल के बाद आने वाली 1 जनवरी को दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पुलिस सेवा (DANIPS) और दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सिविल सेवा (DANICS) के अधिकारियों की "अप्रूव्ड सर्विस" (मान्यता प्राप्त सेवा) तय करने के लिए अहम तारीख माना जाएगा। [2026 LiveLaw (Del) 601]

    जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की दो याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए यह निर्देश दिया। इन याचिकाओं में सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें DANIPS (संशोधन) नियम, 2022 और DANICS (संशोधन) नियम, 2022 को रद्द कर दिया गया।

    ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि संबंधित नियमों में संशोधन किया जाए और परीक्षा वाले साल के बाद आने वाली 1 जनवरी को 'अप्रूव्ड सर्विस' तय करने के लिए अहम तारीख माना जाए।

    सरकार उन संशोधनों को रद्द किए जाने से नाखुश थी, जिनमें DANIPS नियम, 2003 और DANICS नियम, 2003 के तहत 'अप्रूव्ड सर्विस' की गणना और प्रमोशन के लिए अहम तारीख, दोनों के तौर पर 1 जुलाई को तय किया गया।

    इससे पहले, DANIPS नियम, 2003 के नियम 2(e) के अनुसार, DANIPS के लिए 'अप्रूव्ड सर्विस' की शुरुआत सिविल सेवा परीक्षा के बाद वाले साल की 1 जुलाई से होती थी। हालांकि, शेड्यूल III के नोट के तहत प्रमोशन के लिए योग्यता तय करने की अहम तारीख उस साल की 1 जनवरी तय की गई, जिस साल वैकेंसी हुई। इस अंतर के कारण अधिकारियों के प्रमोशन में अनावश्यक देरी होती थी।

    केंद्र सरकार का तर्क था कि 2022 के संशोधनों का मकसद केवल दोनों तारीखों को 1 जुलाई पर लाकर देरी को खत्म करना था और अदालतों को प्रशासनिक नीतिगत फैसलों की जगह अपनी राय नहीं थोपनी चाहिए।

    यह भी तर्क दिया गया कि 1 जनवरी को गणना की तारीख मानने से DANIPS/DANICS अधिकारियों को अन्य सेवाओं के मुकाबले अनचाहे फायदे मिल सकते हैं। याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर 'अप्रूव्ड सर्विस' (मान्यता प्राप्त सेवा) की गिनती 1 जुलाई से की जाती है तो AFHQCS की तुलना में DANICS/DANIPS की सेवा अवधि में छह महीने की कमी आएगी।

    कोर्ट ने आगे कहा कि हालांकि रद्द किए गए संशोधनों ने DANIPS/DANICS के प्रमोशन में देरी की समस्या को हल कर दिया, लेकिन इससे AFHQCS की तुलना में उनकी सेवा अवधि में कमी, उनकी पात्रता में देरी और IAS/IPS में अपने समकालीनों की तुलना में खराब सीनियरिटी (वरिष्ठता) की समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    कोर्ट ने कहा,

    "'अप्रूव्ड सर्विस' की गिनती के लिए 1 जुलाई की तारीख तय करने से भेदभावपूर्ण व्यवहार खत्म नहीं होगा। ट्रिब्यूनल ने सही कहा है कि ये संशोधन मुकदमेबाजी के पहले दौर में पहचानी गई असमानता को और बढ़ाते हैं और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।"

    कोर्ट ने आगे कहा:

    "जब AFHQCS (एक और ग्रुप 'B' सेवा) को प्रमोशन में 'नोशनल सर्विस' (काल्पनिक सेवा) का लाभ दिया जा रहा है तो याचिकाकर्ता का यह तर्क कि 'अप्रूव्ड सर्विस' की गिनती के लिए 1 जनवरी की तारीख तय करने से DANICS/DANIPS को अनुचित लाभ मिलेगा, गलत साबित होता है। यह स्पष्ट है कि इन संशोधनों का असर ट्रिब्यूनल द्वारा पहले दौर में की गई टिप्पणियों को दरकिनार करने जैसा था, जबकि मूल कमियों को दूर नहीं किया गया।"

    हालांकि, बेंच ने कहा कि ट्रिब्यूनल के उस निर्देश को बरकरार रखना उचित नहीं होगा, जिसमें परीक्षा के वर्ष के बाद 1 जनवरी को 'अप्रूव्ड सर्विस' तय करने के लिए मुख्य तारीख मानकर संबंधित नियमों में संशोधन करने को कहा गया।

    संशोधन नोटिफिकेशनों को रद्द करने के फैसले को सही ठहराते हुए कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को एक खास तरीके से नियमों में संशोधन करने का निर्देश देकर ट्रिब्यूनल ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है।

    कोर्ट ने निर्देश दिया,

    "इसलिए MHA और DoPT को निर्देश दिया जाता है कि वे सोच-समझकर एक प्रक्रिया अपनाएं और एक ऐसा तरीका तय करें जो इस कोर्ट और ट्रिब्यूनल द्वारा बताई गई समस्याओं का समाधान करे। साथ ही DANICS/DANIPS के भविष्य की संभावनाओं पर कोई बुरा असर न डाले। यह प्रक्रिया अधिमानतः इस तारीख से दो महीने के भीतर पूरी की जानी चाहिए।"

    इसमें आदेश दिया गया,

    “जब तक कानून के अनुसार ऐसे संशोधन पास नहीं हो जाते—जैसा कि AFHQCS के मामले में हुआ था—तब तक DANIPS/DANICS की मंज़ूरशुदा सेवा तय करने के लिए परीक्षा वाले साल के बाद आने वाली 1 जनवरी को ही अहम तारीख माना जाएगा।”

    Title: UNION OF INDIA v. SANJEEV KUMAR YADAV AND ANR and other connected matter

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