IRCTC घोटाला मामला: सुजाता होटल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक
Amir Ahmad
7 Oct 2026 1:46 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित IRCTC घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुजाता होटल के खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई।
जस्टिस सचिन दत्ता ने 10 सितंबर को ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित आदेश पर होटल के संबंध में अगली सुनवाई तक रोक लगाई है। मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।
हाईकोर्ट ने सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस भी जारी किया। कंपनी ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उसके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 की धारा 3 के साथ धारा 4 के तहत आरोप तय करने का निर्देश दिया गया।
अभियोजन का मामला IRCTC की ओर से रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटल के संचालन के लिए सुजाता होटल को ठेका दिए जाने से जुड़ा है। आरोप है कि होटल से जुड़े लोगों ने निविदा प्रक्रिया में कथित तौर पर हेरफेर किया और एक कंपनी मेसर्स DMPCLको कुछ जमीन कथित रूप से कम कीमत पर हस्तांतरित की गई। अभियोजन के अनुसार यह कंपनी कथित लाभार्थियों से जुड़ी थी और यह पूरा लेनदेन एक कथित अवैध व्यवस्था का हिस्सा था।
सुजाता होटल की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 70(1) किसी कंपनी द्वारा किए गए उल्लंघन और उसके कारोबार के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका से संबंधित है। दलील दी गई कि कंपनी स्वाभाविक रूप से अपने व्यक्तियों के माध्यम से काम करती है और यदि रिकॉर्ड पर आवश्यक सामग्री हो तो उसके निदेशकों के कृत्यों को कंपनी से जोड़ा जा सकता है।
हालांकि, कंपनी की ओर से यह तर्क दिया गया कि केवल किसी व्यक्ति के निदेशक होने के आधार पर उसके निजी कृत्यों या व्यक्तिगत दायित्व को स्वतः कंपनी पर नहीं डाला जा सकता। कंपनी के लिए जिम्मेदार ठहराए गए कृत्यों और धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 3 के दायरे में आने वाली गतिविधि के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से स्थापित करना जरूरी है।
वकील ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश में ऐसी कोई विशिष्ट सामग्री नहीं बताई गई, जो सीधे कंपनी को कथित अपराध से जोड़ती हो। इसके अलावा, आदेश में यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि कंपनी के निदेशकों द्वारा किए गए निजी जमीन संबंधी लेनदेन को कंपनी के कृत्य के रूप में क्यों माना गया।
कंपनी की ओर से यह भी दलील दी गई कि केवल कंपनी और उसके निदेशकों की कथित जिम्मेदारी को समान मान लेने से आवश्यक कानूनी शर्त पूरी नहीं हो जाती।
इन दलीलों पर हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया कहा कि इस विशेष मामले के तथ्यों को देखते हुए यह सवाल आगे विचार किए जाने की जरूरत है कि निदेशकों के कृत्यों को किस आधार पर कंपनी के कृत्यों के रूप में माना जा सकता है।
कोर्ट ने ED से जवाब मांगा और निर्देश दिया कि उसके जवाब में वह उस सटीक सामग्री का उल्लेख करे, जो धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 3 के दायरे में आने वाली संबंधित गतिविधि में कंपनी की कथित संलिप्तता को स्थापित करती है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक ट्रायल कोर्ट के विवादित आदेश और उसके आधार पर चल रही आगे की कार्यवाही पर, जहां तक वह सुजाता होटल से संबंधित है, रोक रहेगी।
ट्रायल कोर्ट के इसी आदेश में पूर्व बिहार मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव, पत्नी राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों के खिलाफ भी धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए।
मामले में मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, मेसर्स सुजाता होटल्स, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और मेसर्स अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड आरोपी हैं।

