Inter-Country Adoptions | दिल्ली हाईकोर्ट ने OCI कपल को राहत दी, CARA को बच्चे के गोद लेने के लिए NOC जारी करने का निर्देश दिया
Shahadat
2 July 2026 7:35 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) को निर्देश दिया कि वह ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले 'ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया' (OCI) कपल को एक नाबालिग बच्चे को गोद लेने के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) जारी करे।
CARA ने कपल को NOC देने से मना कर दिया था, क्योंकि उनका कहना था कि 'एडॉप्शन रेगुलेशंस, 2022' के रेगुलेशन 68 (जो दूसरे देशों के बीच गोद लेने की प्रक्रिया से संबंधित है) का पालन नहीं किया गया था। CARA का कहना था कि कपल ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों से स्पॉन्सरशिप लेटर पेश नहीं कर पाया।
हालांकि, जस्टिस सचिन दत्ता ने पाया कि यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के हालिया फैसले के दायरे में आता है, जो 'हिंदू एडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956' (HAMA) के तहत 'एक्सपैट्रिएट एडॉप्शन' (विदेश में रहने वाले भारतीयों द्वारा गोद लेने) से संबंधित था।
'मंगेश भास्करराव मनवतकर और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य' (2025) मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि हालांकि रेगुलेशन 68 आमतौर पर दूसरे देशों के बीच गोद लेने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में - जैसे HAMA के तहत करीबी रिश्तेदारों के बीच गोद लेना या ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों द्वारा 'एक्सपैट्रिएट एडॉप्शन' के तौर पर वर्गीकृत मामले - रेगुलेशन 69 का सहारा लेना जरूरी हो जाता है।
रेगुलेशन 69 उस गोद लेने की प्रक्रिया का विवरण देता है, जो पहले ही HAMA के तहत पूरी हो चुकी हो।
इस मामले में नाबालिग बच्चे ने (अपने गोद लेने वाले माता-पिता के माध्यम से) CARA द्वारा गोद लेने के लिए NOC और 'कन्फर्मिटी सर्टिफिकेट' जारी करने से इनकार करने को चुनौती दी।
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि रेगुलेशन 68 का पालन करना असंभव था, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी HAMA के तहत पूरी हुई गोद लेने की प्रक्रियाओं पर कार्रवाई नहीं करते हैं, बल्कि उन्हें "एक्सपैट्रिएट एडॉप्शन" के रूप में वर्गीकृत करते हैं।
हाईकोर्ट ने पाया कि ऑस्ट्रेलियाई गृह विभाग को बच्चे की इमिग्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए CARA से सपोर्ट लेटर या NOC की आवश्यकता थी।
इसके अनुसार, कोर्ट ने CARA को निर्देश दिया कि संबंधित डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा रेगुलेशन 69 के तहत जांच पूरी करने के बाद जरूरी NOC जारी किया जाए।
Case title: Ms.Karnika Khandelwal, Represented By Abhinav Khandelwal And Hema Pandey v. UoI


