जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती

  • जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती

    इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के प्रमुख उदय भानु चिब ने दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए तय जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया।

    इसी तरह की एक याचिका वकील स्वाति मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में भी दायर की।

    चिब ने यह अर्ज़ी अपनी उस लंबित याचिका के तहत दायर की, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति के अनुरोध पर फिर से विचार करने की मांग की गई। इस याचिका में मांग की गई कि सुरक्षा, ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को उचित शर्तों के ज़रिए कैसे हल किया जा सकता है, इस पर नए सिरे से और तर्कसंगत तरीके से विचार किया जाए।

    जस्टिस अमित महाजन ने मंगलवार को चिब को याचिका के 'प्रेयर क्लॉज़' (मांग वाले हिस्से) में बदलाव करने की इजाज़त दी थी। ऐसा करते हुए जज ने बाकी मांगों पर नोटिस भी जारी किया था।

    यह अर्ज़ी दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसकी घोषणा 12 अक्टूबर को गृह मंत्रालय (MHA) की बनाई एक कमेटी की सिफारिश के बाद की गई।

    दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा दिल्ली में विरोध प्रदर्शन या रैलियां आयोजित करने के दिशानिर्देशों पर जारी एक 'स्टैंडिंग ऑर्डर' (SO) के मुताबिक, MHA ने मौजूदा तय जगह के बजाय विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए वैकल्पिक और उपयुक्त जगहों की जांच करने के लिए एक कमेटी बनाई।

    स्टैंडिंग ऑर्डर में कहा गया,

    "कमेटी की सिफारिश के आधार पर, जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन की जगह के तौर पर डी-नोटिफाई कर दिया गया। विरोध प्रदर्शन या रैलियां आयोजित करने के लिए तीन नई जगहों - रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड (पूर्वी दिल्ली) - को तय किया गया।"

    इसमें आगे कहा गया कि इन तीन जगहों पर विरोध प्रदर्शन या रैलियां आयोजित करने के लिए एक विस्तृत SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी।

    अपनी याचिका की मांग (c) के ज़रिए, चिब ने यह घोषणा करने की मांग की कि 2022 के स्टैंडिंग ऑर्डर को शांतिपूर्ण सभाओं पर अपने-आप या ज़रूरत से ज़्यादा रोक लगाने के लिए लागू नहीं किया जा सकता, जब तक कि हर मामले की अलग-अलग जांच न की जाए और कम पाबंदी वाले रेगुलेटरी उपायों पर विचार न किया जाए।

    इस याचिका में 2022 के स्टैंडिंग ऑर्डर (SO 48) को इस हद तक चुनौती दी गई कि इसमें एक अंदरूनी प्रशासनिक निर्देश को अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत मिले अधिकारों पर रोक लगाने की ताकत का स्वतंत्र स्रोत माना गया, जबकि इसके लिए कोई कानूनी संवैधानिक या वैधानिक आधार नहीं है और न ही स्टैंडिंग ऑर्डर में बताई गई व्यक्तिगत जांच की प्रक्रिया अपनाई गई।

    याचिका की मांग (d) में अधिकारियों से IYC के अनुरोध पर फिर से विचार करने को कहा गया। इसमें एक नई, तर्कपूर्ण और व्यक्तिगत जांच करने और यह देखने की मांग की गई कि क्या सुरक्षा, ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को उचित शर्तों के साथ हल किया जा सकता है।

    गौरतलब है कि पिछले हफ़्ते सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह जंतर-मंतर की जगह शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए किसी दूसरी जगह को तय करने पर विचार करे। कोर्ट ने यह सुझाव भी ध्यान में रखा कि प्रदर्शनकारियों के लिए ज़रूरी सुविधाओं वाली कोई वैकल्पिक जगह चुनी जानी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश तब दिया जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि सक्षम अधिकारी शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी दूसरी जगह को तय करने पर विचार करेंगे और उन्होंने इस बयान को आदेश में दर्ज करने का अनुरोध किया।

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