'आप उनके घर में कैसे घुस सकते हैं?': प्रदर्शन से पहले नदीम खान को कथित तौर पर हिरासत में लेने पर हाईकोर्ट का दिल्ली पुलिस से सवाल
Shahadat
12 Oct 2026 12:47 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (12 अक्टूबर) को दिल्ली पुलिस से मौखिक रूप से पूछा कि वे 'एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स' (APCR) के नेशनल सेक्रेटरी नदीम खान के घर में क्यों घुसे। खान का आरोप है कि 29 सितंबर को पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था ताकि वे जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने को चुनौती देने वाली खान की याचिका पर नोटिस जारी किया।
सुनवाई के दौरान, एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की बेंच ने पुलिस से उनका जवाब मांगा, जबकि याचिका उन्हें पहले ही दी जा चुकी थी।
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के वकील से मौखिक रूप से यह भी पूछा,
"आप इस व्यक्ति के घर में कैसे घुस सकते हैं? आपको अपनी ड्यूटी करने का अधिकार है, लेकिन आप इस तरह से कैसे कर सकते हैं? उन्हें हिरासत में रखने का आपके पास क्या कारण है? अनुमति न देना आपका अधिकार है। हमें दिखाएं कि कानून में ऐसा कहां लिखा है..."
पुलिस के वकील ने कहा कि खान को हिरासत में नहीं लिया गया और पुलिस केवल पूछताछ करने गई। इसके बाद उन्होंने जवाब दाखिल करने की अनुमति मांगी।
इस बीच, खान के वकील ने इस बात का विरोध किया और कहा कि खान को 29 सितंबर को हिरासत में लिया गया।
खान की ओर से पेश वकील शाहरुख आलम ने तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि 29 सितंबर को पुलिस अधिकारी बिना किसी नोटिस या आदेश के उनके घर और उसी परिसर में स्थित ऑफिस आए और उन्हें हिरासत में ले लिया। आलम ने कहा कि पुलिस अधिकारी खान के ऑफिस परिसर में घुसे और पूरे दिन वहीं रहे। उन्होंने कहा कि उस दिन से लगातार निगरानी रखी जा रही है।
आलम ने कहा कि पुलिस अधिकारी 29 सितंबर की शाम 5:30 बजे तक वहां रुके रहे।
आलम ने कहा,
"मैंने उन्हें लंच और चाय दी। कोई नोटिस या आदेश नहीं दिखाया गया। 2 अक्टूबर को मेरी मां की तबीयत ठीक नहीं थी और उन्होंने मुझे फोन करके पूछा कि मैं कहां जा रही हूं। उन्होंने मुझे रोका नहीं, लेकिन लगातार निगरानी रखी जा रही थी।"
आलम ने बताया कि संबंधित अधिकारी का फोन नंबर याचिका में दिया गया। उन्होंने कहा कि खान को लगातार परेशान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खान विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पाए, क्योंकि उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
उन्होंने कहा,
"आज मैं सिर्फ़ इस बात की मांग कर रही हूं कि इसे उत्पीड़न घोषित किया जाए।"
आलम ने बताया कि खान APCR के सेक्रेटरी हैं। उन्होंने CEC विरोध प्रदर्शनों के बारे में रविवार को सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का भी ज़िक्र किया, जिनमें लोगों के आज़ादी से आने-जाने की इजाज़त दी गई।
आलम ने कहा,
"मैं तीन निर्देशों के दायरे में आता हूं। 16 (b) (लोगों के आज़ादी से आने-जाने और शांतिपूर्ण मामलों में गैर-कानूनी हिरासत न होने) से संबंधित निर्देश अहम हैं। मुझे समय-समय पर फ़ोन आते हैं कि मैं क्या कर रही हूं। अगर वे मेरे ऑफ़िस आते हैं, तो मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है। मैं वकीलों के साथ नियमित रूप से तालमेल बिठाकर काम करती हूं। उनकी PIL (जनहित याचिका) दायर करने की लंबी हिस्ट्री रही है।"
उन्होंने यह भी कहा कि खान एक सोशल एक्टिविस्ट हैं।
वहीं, दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि 29 सितंबर को उन्होंने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त मांगी थी, जिसे नामंज़ूर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि शाहीन बाग़ पुलिस स्टेशन को जानकारी मिली थी कि वह फिर भी विरोध प्रदर्शन करेंगे। वकील ने कहा कि पुलिस शाम 5:30 बजे चली गई और "कोई हिरासत नहीं ली गई"।
पुलिस के वकील ने कहा,
"यह सिर्फ़ उनकी आवाजाही को रोकने के लिए था, क्योंकि इजाज़त नहीं दी गई। उसके बाद हम उनसे मिलने नहीं गए।"
आदेश लिखाते समय कोर्ट ने पुलिस वकील की दलील पर ध्यान दिया कि अधिकारियों को सिर्फ़ आवाजाही पर नज़र रखने के मकसद से तैनात किया गया।
कोर्ट ने कहा,
"आज की तारीख़ में याचिकाकर्ता की आवाजाही पर कोई रोक नहीं है और यह कहा गया कि SC के आदेश का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। प्रतिवादी को नोटिस जारी किया जाए। और दो हफ़्ते के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की जाए।"
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के वकील का यह बयान भी रिकॉर्ड पर लिया कि खान को कोई फ़ोन कॉल नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने कहा,
"चूंकि यह बयान SHO के निर्देशों के आधार पर दिया गया, इसलिए इसे स्वीकार किया जाता है।"
इस बीच, ASG चेतन शर्मा ने कहा कि शायद नोटिस जारी न किया जाए क्योंकि इसका गलत मतलब निकाला जा सकता है।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह नोटिस जारी कर रहा है क्योंकि पहले ही कॉपी दे दी गई।
कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा,
"उन्हें आज स्टेटस रिपोर्ट के साथ तैयार रहना चाहिए। स्टेटस रिपोर्ट न दाखिल करने के उनके इरादे का मतलब है कि वे कोर्ट का आदेश चाहते हैं।"
खान का आरोप है कि उन्हें शाहीन बाग़ पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों ने अबुल फ़ज़ल एन्क्लेव स्थित जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुख्यालय में सुबह लगभग 9:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक रोककर रखा, ताकि वे विरोध प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।
बता दें, पुलिस ने कथित तौर पर खान को जंतर-मंतर पर होने वाले उस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोका था, जो पूजा स्थलों पर हमलों और मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के ज़रिए नागरिकों को बाहर करने के खिलाफ़ आयोजित किया गया।
याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई कि उनकी एहतियाती हिरासत, लगातार निगरानी और कथित उत्पीड़न गैर-कानूनी और असंवैधानिक हैं।
उन्होंने दिल्ली पुलिस द्वारा जारी बिना तारीख वाले उस निषेधाज्ञा आदेश को भी चुनौती दी, जिसके तहत पूरे नई दिल्ली ज़िले (जंतर-मंतर सहित) में किसी भी व्यक्ति के लिए पांच या उससे ज़्यादा लोगों के समूह में इकट्ठा होने, कोई प्रदर्शन या धरना देने, कोई भाषण देने या कोई बैनर या प्लेकार्ड ले जाने पर रोक लगाई गई है - सिवाय इसके कि "पहले से लिखित अनुमति" ली गई हो।
खान का तर्क है कि यह व्यापक प्रतिबंध भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत गारंटीकृत अभिव्यक्ति की आज़ादी और शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होने के मौलिक अधिकारों का अनुचित रूप से हनन करता है, साथ ही अनुच्छेद 14 और 21 का भी उल्लंघन करता है।
याचिका के अनुसार, खान को न तो औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया और न ही उनकी हिरासत का कोई लिखित कारण बताया गया। यह भी आरोप है कि उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया और उनकी हिरासत के बारे में उनके रिश्तेदारों को कोई सूचना नहीं दी गई। याचिका में कहा गया कि 19 सितंबर को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में विरोध प्रदर्शन की अनुमति के लिए एक आवेदन दिया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
खान का आरोप है कि बाद में उन्हें एक अनजान फ़ोन कॉल के ज़रिए बताया गया कि विरोध प्रदर्शन की अनुमति रद्द कर दी गई। उनका दावा है कि उन्होंने SHO के सामने इस कथित रद्दीकरण को चुनौती दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इसके अलावा, खान ने कहा कि प्रस्तावित प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और इसमें हिंसा, शांति भंग, रुकावट या किसी अपराध के होने की कोई आशंका नहीं थी।
यह याचिका वकील चिन्मय कनौजिया, अर्चित कृष्णा, तमन्ना पंकज और प्रिया वत्स के ज़रिए दायर की गई।
Case Title : Nadeem Khan v. State
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