Excise Policy: दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI की याचिका के 'मेंटेनेबिलिटी' पर शुरुआती सुनवाई की मांग वाली अर्ज़ी खारिज की
Shahadat
9 Oct 2026 8:05 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अर्ज़ी खारिज की। इस अर्ज़ी में कथित शराब नीति घोटाले मामले में 23 आरोपियों को आरोपमुक्त (डिस्चार्ज) किए जाने के खिलाफ CBI की रिवीजन याचिका की 'मेंटेनेबिलिटी' (सुनवाई योग्य होने) पर शुरुआती सुनवाई की मांग की गई।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आरोपी विजय नायर की अर्ज़ी खारिज की। नायर ने कोर्ट के पहले के निर्देशों में बदलाव की मांग की थी ताकि मुख्य मामले की मेरिट पर सुनवाई से पहले CBI की याचिका की 'मेंटेनेबिलिटी' पर उनकी आपत्ति सुनी और तय की जा सके।
कोर्ट ने कहा कि हालांकि उसे सीनियर वकील की ज़िम्मेदारी की भावना पर कोई शक नहीं है, जिसके साथ उन्होंने मामले को देखा है, लेकिन सच्चाई यह है कि संबंधित आदेश खुले कोर्ट में बोला गया और उसके बाद जस्टिस शर्मा ने उस पर हस्ताक्षर किए।
कोर्ट ने कहा,
"न्यायिक रिकॉर्ड, जिसमें कोर्ट के सामने हुई कार्यवाही और दलीलें दर्ज होती हैं, उसे बाद में किए गए किसी विपरीत दावे के आधार पर नहीं बदला जा सकता। जब उनकी मौजूदगी में आदेश बोला गया, तब वकील की ओर से कोई आपत्ति नहीं उठाई गई।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"इसके बाद आदेश अपलोड किया गया। दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड होने के बाद से पांच महीने बीत चुके हैं। इस दौरान न तो ऐसी कोई अर्ज़ी दी गई और न ही संबंधित रोस्टर बेंच के सामने आदेश में सुधार या मामले को इस कोर्ट के सामने रखने का कोई अनुरोध किया गया।"
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रोस्टर बेंच के सामने उठाई गई किसी भी अन्य अर्ज़ी पर विचार करने की उसे आज़ादी होगी और आज (शुक्रवार) के आदेश को रिवीजन याचिका की 'मेंटेनेबिलिटी' पर शुरुआती आपत्तियों की मेरिट पर राय के तौर पर नहीं देखा जाएगा।
इस अर्ज़ी में 8 मई को दिए गए और 17 अगस्त को दोहराए गए उस निर्देश को चुनौती दी गई, जिसमें कहा गया कि रिवीजन याचिका की 'मेंटेनेबिलिटी' पर शुरुआती आपत्तियों पर मुख्य याचिका के साथ ही विचार किया जाएगा।
नायर का तर्क है कि रिवीजन याचिका सही तरीके से दायर की गई या नहीं, इस सवाल का फैसला सबसे पहले होना चाहिए, इससे पहले कि कोर्ट CBI की ओर से आरोपमुक्त करने के आदेश को चुनौती देने के मामले की मेरिट पर विचार करे। नायर ने तर्क दिया है कि केस की सुनवाई की योग्यता (मेंटेनेबिलिटी) पर पहले फैसला करने से कोर्ट का समय बचेगा, खासकर इसलिए क्योंकि CBI की रिविज़न याचिका 23 प्रतिवादियों से जुड़ी है।
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था, जिनमें केजरीवाल, सिसोदिया और के. कविता जैसे नेता भी शामिल थे। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी।
Case Title : CBI v. Kuldeep Singh & Ors

