इंजीनियर राशिद को कड़ी शर्तों पर जमानत मिल सकती है? दिल्ली हाईकोर्ट ने NIA से मांगा जवाब
Amir Ahmad
9 Sept 2026 6:28 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से पूछा कि आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने के मामले में जेल में बंद बारामूला सांसद अब्दुल राशिद शेख उर्फ इंजीनियर राशिद को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जा सकती है या नहीं।
कोर्ट ने संकेत दिया कि जमानत मिलने की स्थिति में उन्हें केवल राष्ट्रीय राजधानी में रहने जैसी शर्त लगाई जा सकती है।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने NIA की ओर से पेश सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा को इस संबंध में निर्देश लेने को कहा।
मामले की अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी।
कोर्ट इंजीनियर राशिद की उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा जमानत देने से इनकार किए जाने के आदेश को चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान NIA ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इंजीनियर राशिद के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद है और उन्हें राहत नहीं दी जानी चाहिए।
सीनियर वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि एक मौके पर जब राशिद को जमानत मिली थी तब उन्होंने एक गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की थी। उन्होंने इसके समर्थन में कॉल विवरण रिकॉर्ड का भी हवाला दिया।
NIA ने यह भी कहा कि मामले में आरोप गंभीर हैं। एजेंसी का आरोप है कि राशिद राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और उनके एक आतंकवादी से संबंध भी हैं।
जब NIA ने बताया कि मामले में दो गवाहों की गवाही बेहद महत्वपूर्ण है, जिनमें एक संरक्षित गवाह भी शामिल है तो हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले दोनों गवाहों के बयान निचली अदालत में दर्ज किए जाएं।
इंजीनियर राशिद को इससे पहले अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने और बाद में उनकी 40वीं की रस्म में हिस्सा लेने के लिए जमानत दी गई।
राशिद 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट से सांसद चुने गए। वह 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। NIA ने उन्हें कथित आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया था।
इस साल जनवरी में दिल्ली हाईकोर्ट ने UAPA मामले में आरोप तय करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली राशिद की अपील खारिज की थी। कोर्ट ने कहा था कि आरोप तय करने का आदेश अंतरिम प्रकृति का है और उसके खिलाफ अपील सुनवाई योग्य नहीं है।
इस संबंध में हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 के एक समकक्ष पीठ के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि NIA Act के तहत आरोप तय करने के आदेश को अंतरिम आदेश होने के कारण अपील में चुनौती नहीं दी जा सकती।


