DTC की सभी बसें सड़कों पर चलें, यात्रियों को मिले सेवा: दिल्ली हाईकोर्ट का सरकार को निर्देश

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    दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार और दिल्ली परिवहन निगम (DTC) को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि डीटीसी की पूरी बसें सड़कों पर चलें और यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

    कोर्ट ने कहा कि हालात में सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी बस सेवा बहाल करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

    चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने DTC बसों की सेवा बाधित होने के खिलाफ दायर जनहित याचिका का निपटारा किया।

    यह याचिका अमी सिसोदिया ने दायर की थी जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में डीटीसी और सार्वजनिक बस सेवाओं को तत्काल बहाल करने और उनकी उचित निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई।

    याचिका DTC के ड्राइवरों, कंडक्टरों और बस संचालन से जुड़े अन्य कर्मचारियों की हड़ताल के संदर्भ में दायर की गई। कर्मचारी दैनिक वेतन बढ़ाने, चिकित्सा और दुर्घटना बीमा, सवेतन अवकाश तथा 'समान काम, समान वेतनमान' की व्यवस्था लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। दैनिक वेतन 862 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये किए जाने की मांग भी शामिल है।

    याचिका में कहा गया कि DTC बसों से यात्रा करना दिल्ली में परिवहन का सबसे सस्ता साधन है और बसों के नहीं चलने का सबसे ज्यादा असर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ रहा है।

    याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि बस सेवा बाधित होने से महिलाओं समेत बड़ी संख्या में यात्रियों को महंगे वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

    सुनवाई के दौरान DTC की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा स्थिति में सुधार हुआ है और 96 प्रतिशत बसें सड़कों पर चल रही हैं।

    इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि स्थिति में सुधार हो रहा है इसलिए फिलहाल कोई विशेष आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि कोर्ट ने दिल्ली सरकार और DTC से अपेक्षा की कि वे सभी जरूरी कदम उठाएं ताकि DTC की पूरी बसें सड़कों पर उतरें और यात्रियों को सेवा उपलब्ध कराएं।

    कोर्ट को DTC की ओर से यह भी बताया गया कि 16-17 सितंबर को दिल्ली सरकार को आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1968 लागू करने के संबंध में प्रस्ताव भेजा गया।

    इस पर पीठ ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति की समीक्षा करे और डीटीसी बसों का सड़कों पर संचालन बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए।

    हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि एक सप्ताह के भीतर स्थिति में सुधार नहीं होता है तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का रुख कर सकती है।

    याचिका में कहा गया था कि बस सेवा बाधित होने का विशेष असर उन महिला यात्रियों पर पड़ा है, जो दिल्ली सरकार की मुफ्त बस यात्रा सुविधा पर निर्भर हैं। सेवा बाधित होने के कारण उन्हें काफी महंगे वैकल्पिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

    याचिका के अनुसार यह समस्या केवल याचिकाकर्ता या महिला यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली की बड़ी आबादी इससे प्रभावित हो रही है। इनमें छात्र, दिहाड़ी मजदूर, वेतनभोगी कर्मचारी, वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग व्यक्ति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग शामिल हैं, जो सस्ती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर निर्भर हैं।

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