NFAC में मामलों की निपटान की देरी पर दिल्ली हाईकोर्ट की जताई नाराजगी

Praveen Mishra

4 March 2025 12:14 PM IST

  • NFAC में मामलों की निपटान की देरी पर दिल्ली हाईकोर्ट की जताई नाराजगी

    दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय फेसलेस अपील केंद्र (NFAC) के समक्ष लंबित 5.4 लाख से अधिक अपीलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। यह निकाय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 143 या 144 के तहत फेसलेस आकलन के लिए बनाया गया था, जिसे कराधान और अन्य विधियां (कुछ उपबंधों की शिथिलता और संशोधन) अधिनियम, 2020 के माध्यम से धारा 144B जोड़कर स्थापित किया गया था।

    चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "यह न्यायालय NFAC के समक्ष लंबित बड़ी संख्या में वैधानिक अपीलों से अवगत है और इन अपीलों के निपटान में हो रही देरी को लेकर चिंता व्यक्त करता है, जबकि NFAC की स्थापना ही इस उद्देश्य के लिए की गई थी।"

    अदालत ने NFAC को शीघ्र आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने और लंबित अपीलों के निपटान के निर्देश दिए हैं। यह मामला एक याचिका के संदर्भ में आया, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपनी आयकर अपील के आयकर आयुक्त (अपील) के समक्ष दो साल से अधिक समय से लंबित होने का मुद्दा उठाया था। याचिकाकर्ता ने अपनी अपील के शीघ्र निपटान के साथ-साथ ब्याज और प्रतिपूरक लागत प्रदान करने की मांग की, क्योंकि इसमें “अत्यधिक देरी” हुई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया कि करदाताओं को होने वाली कथित प्रताड़ना को रोकने के लिए लंबित अपीलों के निपटान हेतु दिशानिर्देश जारी किए जाएं।

    सुनवाई के दौरान, विभाग की ओर से उपस्थित सिनियर एडवोकेट ने NFAC द्वारा लंबित अपीलों के निपटान के लिए तैयार किया गया एक रोडमैप अदालत को सौंपा, जो कि केंद्रीय कार्य योजना 2024-25 के अनुसार तैयार किया गया है।

    इसके बाद, अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि NFAC पूरी गंभीरता के साथ इन सुधारात्मक उपायों को लागू करेगा।

    जहां तक याचिकाकर्ता का मामला है, अदालत ने उसके अपील का निपटान 8 सप्ताह के भीतर करने का आदेश दिया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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