[दिल्ली दंगे] साज़िश बैठकों का हिस्सा नहीं, कोई बरामदगी नहीं हुई: मीरान हैदर ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए दी दलील

Praveen Mishra

16 April 2025 9:49 PM IST

  • [दिल्ली दंगे] साज़िश बैठकों का हिस्सा नहीं, कोई बरामदगी नहीं हुई: मीरान हैदर ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए दी दलील

    दिल्ली दंगा बड़े षड्यंत्र मामले में आरोपी मीरान हैदर ने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वह उन "षड्यंत्र बैठकों" का हिस्सा नहीं थे, जिनके बारे में कहा गया है कि वे 2020 के दंगों को भड़काने के लिए की गई थीं। हैदर के वकील ने जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ के समक्ष जमानत याचिका पर दलीलों का जवाब पेश करते हुए यह बात कही। वकील ने कहा कि हैदर DPSG व्हाट्सएप ग्रुप का सदस्य नहीं था और दिल्ली पुलिस द्वारा हिंसा के लिए जिम्मेदार माने गए किसी भी संदेश का स्रोत मीरान हैदर नहीं है।

    चांद बाग और सीलमपुर इलाकों में हुई "गुप्त बैठकों" को लेकर वकील ने कहा, "यह खुद उनका (प्रॉसिक्यूशन का) स्वीकार किया गया मामला है कि मैं उन बैठकों का हिस्सा नहीं था... गवाहों ने मेरा नाम नहीं लिया है।" वकील ने आगे कहा कि हैदर किसी भी CCTV फुटेज या तस्वीरों में नहीं दिखता, जिन पर अभियोजन पक्ष ने भरोसा करते हुए अन्य सह-आरोपियों को हथियारों के साथ दिखाने का दावा किया है। "उन्होंने सह-आरोपियों से हथियार बरामदगी से संबंधित दस्तावेज दिखाए हैं। मेरे खिलाफ न तो कोई ऐसा आरोप है और न ही कोई बरामदगी," वकील ने कहा।

    सह-आरोपी शिफा-उर-रहमान और मोहम्मद सलीम खान की ओर से भी जवाबी दलीलें पेश की गईं।

    सिनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद रहमान की ओर से पेश हुए और कहा कि उन्होंने हौज़ रानी के प्रदर्शन स्थल का दौरा केवल प्रदर्शनकारियों को नैतिक समर्थन देने के लिए किया था।

    उन्होंने यह भी कहा कि रहमान के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें एक उदाहरण के रूप में गिरफ्तार किया क्योंकि वे एक "प्रतिनिधि भूमिका" में थे।

    मोहम्मद सलीम खान की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि खान किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा नहीं थे और कथित मुख्य षड्यंत्रकारियों और उनके बीच कोई आपसी संवाद नहीं था। उन्होंने कहा कि खान ने कोई भी भड़काऊ या अन्य प्रकार का भाषण नहीं दिया और न ही उन्होंने कोई आतंकी कृत्य, फंडिंग, धन या हथियारों की बरामदगी में कोई भूमिका निभाई। वकील ने यह भी कहा कि किसी भी गवाह ने यह नहीं कहा कि खान हथियारों से लैस थे या दंगों में शामिल थे। उन्होंने अपनी दलील समाप्त करते हुए कहा कि खान समाज के लिए किसी भी प्रकार का खतरा नहीं हैं।

    इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने होगी। पीठ उमर खालिद, शरजील इमाम, मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, शादाब अहमद, अतहर खान, खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

    FIR 59/2020 दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। इस मामले में आरोपी हैं: ताहिर हुसैन, उमर खालिद, खालिद सैफी, इशरत जहां, मीरान हैदर,ठ गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, आसिफ इकबाल तन्हा, शादाब अहमद, तसलीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान, अतहर खान, सफूरा ज़रगर, शरजील इमाम, फैजान खान और नताशा नरवाल।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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