दिल्ली दंगा साजिश मामले में बड़ा फैसला: हाईकोर्ट ने इशरत जहां की जमानत रद्द करने से किया इनकार
Amir Ahmad
24 April 2026 12:30 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में पूर्व पार्षद इशरत जहां को दी गई जमानत को चुनौती देने वाली दिल्ली पुलिस की अपील खारिज की। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह जमानत आदेश में हस्तक्षेप करने के पक्ष में नहीं है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की खंडपीठ ने कहा कि जमानत दिए हुए चार साल से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान इशरत जहां द्वारा किसी भी शर्त का उल्लंघन करने का कोई आरोप सामने नहीं आया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा,
“हम यह स्पष्ट करते हैं कि हमने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की।”
इशरत जहां को 26 फरवरी, 2020 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 14 मार्च, 2022 को कड़कड़डूमा कोर्ट से जमानत मिली थी। दिल्ली पुलिस ने इस आदेश को चुनौती देते हुए जमानत रद्द करने की मांग की थी।
पुलिस का कहना था कि ट्रायल कोर्ट का आदेश स्थापित कानून के विपरीत है। इसमें ऐसी खामियां हैं, जो मामले की जड़ तक जाती हैं। पुलिस ने यह भी दलील दी कि अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले की सही व्याख्या नहीं की।
साथ ही यह आरोप लगाया गया कि इशरत जहां अन्य आरोपियों के साथ निकट रूप से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने विरोध प्रदर्शन आयोजित करने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके कारण दंगे और संपत्ति को नुकसान हुआ।
हालांकि, जमानत देते समय ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि आरोपपत्र के अनुसार इशरत जहां न तो उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों के दौरान मौजूद थीं और न ही किसी ऐसे संगठन या समूह का हिस्सा थीं जो कथित साजिश से जुड़ा हो।
अदालत ने यह भी माना था कि इशरत जहां खुरेजी में चल रहे विरोध प्रदर्शन से जुड़ी थीं, जो नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के खिलाफ था, लेकिन यह क्षेत्र उत्तर-पूर्वी दिल्ली से सटा हुआ नहीं था, जहां दंगे हुए।
इस मामले में गैरकानूनी गतिविधि निवारण कानून (UAPA) की गंभीर धाराओं सहित कई अन्य कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
हाईकोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट हो गया कि फिलहाल इशरत जहां की जमानत बरकरार रहेगी और पुलिस की अपील को राहत नहीं मिली।

