Vivo मनी लॉन्ड्रिंग केस: पिता की गंभीर बीमारी के बावजूद चीनी अधिकारी को चीन जाने की अनुमति नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

Praveen Mishra

14 July 2026 6:34 PM IST

  • Vivo मनी लॉन्ड्रिंग केस: पिता की गंभीर बीमारी के बावजूद चीनी अधिकारी को चीन जाने की अनुमति नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

    दिल्ली हाईकोर्ट ने वीवो मोबाइल कम्युनिकेशन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी चीनी नागरिक गुआंगवेन कुआंग उर्फ एंड्रयू को अपने गंभीर रूप से बीमार पिता से मिलने के लिए चीन जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मानवीय आधार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे ऐसे मामले में आरोपी की न्यायिक प्रक्रिया में उपस्थिति सुनिश्चित करने की आवश्यकता से ऊपर नहीं हो सकते, जहां कथित अपराध से अर्जित धनराशि ₹2 लाख करोड़ से अधिक हो।

    जस्टिस मधु जैन ने कहा कि भारत और चीन के बीच प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) और आपराधिक मामलों में म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) नहीं होने के कारण यह आशंका बनी रहती है कि यदि आरोपी चीन गया तो उसकी वापसी सुनिश्चित करना बेहद कठिन होगा।

    एंड्रयू ने अदालत से पासपोर्ट अस्थायी रूप से लौटाने और ग्वांगझू जाने की अनुमति मांगी थी। उसने बताया कि उसके 82 वर्षीय पिता को ब्रेन हैमरेज हुआ है और वे लाइफ सपोर्ट पर हैं। उसने भरोसा दिया था कि वह निर्धारित समय के भीतर भारत लौट आएगा।

    हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसका विरोध करते हुए कहा कि एंड्रयू प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत चल रहे उस मामले का आरोपी है, जिसमें करीब ₹2.02 लाख करोड़ की कथित अपराध की आय (Proceeds of Crime) शामिल है। एजेंसी ने कहा कि चीन के साथ प्रत्यर्पण संधि नहीं होने के कारण उसके वापस न लौटने की स्थिति में उसे भारत लाना लगभग असंभव होगा।

    हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एंड्रयू के पिता की बीमारी संबंधी दस्तावेजों की सत्यता का त्वरित सत्यापन भी संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए केवल लेटर रोगेटरी या राजनयिक माध्यम उपलब्ध हैं, जिनमें कई महीने लग सकते हैं।

    इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी के लौटने की कोई प्रभावी कानूनी गारंटी उपलब्ध नहीं है। इसलिए विदेश यात्रा की अनुमति देना न्यायहित में उचित नहीं होगा और याचिका खारिज कर दी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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