यमुना के बाढ़ वाले इलाकों में बसें खड़ी करने के लिए स्कूल बस ऑपरेटर पर लगा ₹11 लाख का जुर्माना सही: दिल्ली हाईकोर्ट
Shahadat
29 July 2026 8:56 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना के बाढ़ वाले इलाकों में 22 बसें खड़ी करने के लिए स्कूल बस ऑपरेटर पर लगाया गया ₹11 लाख का जुर्माना बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील इलाके में कमर्शियल पार्किंग अपने आप में गैर-कानूनी है। इसे सिर्फ़ इसलिए सही नहीं ठहराया जा सकता कि बसें कचरा फेंकने में शामिल नहीं थीं।
जस्टिस जसमीत सिंह ने रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्ट बिज़नेस ऑपरेटर की याचिका खारिज की, जो इको-फ्रेंडली CNG बसों का इस्तेमाल करके स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने की सर्विस देता है।
याचिकाकर्ता ने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) द्वारा जारी कई पेनल्टी नोटिस को चुनौती दी थी। DDA ने यमुना के बाढ़ वाले इलाके में मयूर विहार फेज-I मेट्रो स्टेशन के सामने फ्लाईओवर के नीचे खड़ी 22 बसों में से हर बस पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया।
याचिकाकर्ता ने कहा कि बसें वहां इसलिए खड़ी करनी पड़ीं, क्योंकि स्कूल की बिल्डिंग का रेनोवेशन चल रहा था। उसने तर्क दिया कि प्रति बस ₹50,000 का जुर्माना गलत था, क्योंकि बसें सिर्फ़ खड़ी की गईं और उन्होंने यमुना या उसके बाढ़ वाले इलाके में कोई कचरा नहीं फेंका था।
उसने यह भी तर्क दिया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के 2015 के फैसले में मलबे को गैर-कानूनी तरीके से फेंकने पर ही ₹50,000 का मुआवज़ा तय किया गया, इसलिए ज़्यादा-से-ज़्यादा ₹5,000 का जुर्माना लगाया जा सकता था।
इस तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा,
"NGT और अदालतों की कोशिश यमुना के बाढ़ वाले इलाकों को कब्ज़े और गैर-कानूनी पार्किंग से बचाने की रही है। खास तौर पर 'नदी में कचरा फेंकना' उसी का एक नतीजा है।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"....यह तथ्य कि बसें यमुना के बाढ़ वाले इलाके में खड़ी थीं, अपने आप में गैर-कानूनी है क्योंकि पर्यावरण के लिहाज़ से संवेदनशील इलाके यानी यमुना के बाढ़ वाले इलाके में किसी भी तरह की कमर्शियल गतिविधि की इजाज़त नहीं दी जा सकती। गैर-कानूनी पार्किंग के साथ-साथ तस्वीरों में कचरा और गंदगी भी दिखाई दे रही है।"
इस तरह कोर्ट ने जुर्माना बरकरार रखा और याचिका खारिज की।
Case title: Pradeep Kumar Gupta v. DDA


