FSSAI का ब्रिटानिया को अपने बिस्किट के लेबल से 'नो एडेड शुगर' और 'नो मैदा' जैसे दावों को हटाने का आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक

  • FSSAI का ब्रिटानिया को अपने बिस्किट के लेबल से नो एडेड शुगर और नो मैदा जैसे दावों को हटाने का आदेश: दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक

    दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के आदेश पर रोक लगाई। इस आदेश में ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज लिमिटेड को अपने बिस्किट और कुकीज़ की पैकेजिंग से 'नो एडेड शुगर', 'नो मैदा' और 'नो पाम ऑयल' (पाम ऑयल नहीं) जैसे दावों को हटाने के लिए कहा गया।

    16 अक्टूबर को दिए गए आदेश में जस्टिस अमित महाजन ने प्रथम दृष्टया (prima facie) यह माना कि किसी उत्पाद के बारे में इन तथ्यों को बताना, खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इसे ऐसा नहीं कहा जा सकता कि इससे अन्य निर्माताओं के उत्पादों को कमतर दिखाया जा रहा है या उपभोक्ताओं के व्यवहार को प्रभावित किया जा रहा है।

    कोर्ट ने कहा,

    "प्रथम दृष्टया, यह अदालत याचिकाकर्ता की इस दलील से सहमत है कि उत्पाद में 'नो एडेड शुगर', 'नो मैदा' और 'नो पाम ऑयल' होने का तथ्य बताना, अन्य निर्माताओं के उत्पादों को कमतर दिखाने वाला विज्ञापन नहीं माना जा सकता। साथ ही इसे नियमों का उल्लंघन करते हुए उपभोक्ताओं के व्यवहार को प्रभावित करने वाला भी नहीं कहा जा सकता।"

    कोर्ट ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में FSSAI के 09 अक्टूबर के उस निर्देश को चुनौती दी गई, जिसमें कंपनी को अपने बिस्किट या कुकीज़ की पैकेजिंग से इन तीन दावों को हटाने के लिए कहा गया।

    FSSAI ने 02 सितंबर को कंपनी को एक 'कारण बताओ नोटिस' (Show-Cause Notice) जारी किया। इसमें पूछा गया कि '100% मिलेट्स' (बाजरा/मोटे अनाज) सहित कंपनी के इन दावों को 'खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018' के नियम 6(1) के तहत भ्रामक और अस्वीकार्य क्यों न माना जाए।

    नियामक (FSSAI) का आरोप था कि कुछ खास सामग्रियों के इस्तेमाल न होने के बारे में किए गए ये दावे ऐसी धारणा बना सकते हैं कि वे सामग्रियां असुरक्षित, अवांछनीय या घटिया हैं। इससे उन सामग्रियों की सुरक्षा और खाने के लिए उनकी उपयुक्तता को लेकर बेवजह संदेह पैदा हो सकता है।

    FSSAI ने यह भी आरोप लगाया कि ये दावे अन्य निर्माताओं के उत्पादों को कमतर दिखाते हैं और नियमों 4(1) और 10(5) का उल्लंघन करते हुए उपभोक्ताओं के व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

    ब्रिटानिया की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट संदीप सेठी ने तर्क दिया कि 'नो एडेड शुगर', 'नो मैदा' और 'नो पाम ऑयल' जैसे दावे केवल तथ्य हैं। इन्हें अन्य निर्माताओं के उत्पादों को कमतर दिखाने या नियमों का उल्लंघन करते हुए उपभोक्ताओं के व्यवहार को प्रभावित करने वाले दावों के रूप में नहीं देखा जा सकता। कंपनी के वकील ने यह भी कहा कि अपने इस रुख पर कायम रहते हुए कि बिस्कुट में 100% मिलेट्स (मोटे अनाज) हैं, ब्रिटानिया “100% मिलेट्स” वाले दावे को हटाने के लिए सहमत हो गई।

    अदालत ने FSSAI और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया और 9 अक्टूबर के विवादित पत्र पर रोक लगाई।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि ब्रिटानिया “100% मिलेट्स” वाले दावे के बिना अपने उत्पाद का निर्माण और विपणन कर सकती है।

    इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी, 2027 को होगी।

    Case Title : Britannia Industries Limited v. FSSAI & Ors

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