धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों से बरी होने पर धारा 409 आईपीसी में दोषसिद्धि का आधार खत्म: दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की
Praveen Mishra
8 Jan 2026 10:17 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने धारा 409 आईपीसी (आपराधिक विश्वासघात) के तहत दोषसिद्ध कंपनी निदेशक की सजा निलंबित कर दी है। अदालत ने कहा कि जब निदेशक को धोखाधड़ी (धारा 420) और जालसाजी (धाराएं 468 व 471 आईपीसी) के आरोपों से बरी कर दिया गया है, तो धारा 409 के तहत दोषसिद्धि का मूल आधार (substratum) कमजोर हो जाता है।
जस्टिस विकास महाजन ने यह आदेश उस अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें संयुक्त उद्यम कंपनी से लगभग ₹3 करोड़ की धनराशि के गबन का आरोप था। अदालत ने कहा कि धारा 409 का आरोप जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोपों पर आधारित था और जब ट्रायल कोर्ट ने अन्य दो फर्मों के बिलों तथा बोर्ड मीटिंग्स के मिनट्स के संबंध में जालसाजी व धोखाधड़ी साबित न होने की बात कही, तो धारा 409 के तहत दोषसिद्धि टिक नहीं सकती।
आवेदक को ट्रायल कोर्ट ने धारा 409 के तहत दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी थी, जबकि उसे धारा 420, 468 और 471 आईपीसी के आरोपों से बरी कर दिया गया था। अपीलकर्ता का तर्क था कि कथित गबन का पूरा मामला जाली दस्तावेज़ों और बेईमानी से प्रेरित लेन-देन पर आधारित था, जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने साबित नहीं माना; इसलिए धारा 409 की दोषसिद्धि आंतरिक रूप से असंगत है।
हाईकोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा कि जब जालसाजी और धोखाधड़ी के आरोप स्थापित नहीं हुए, तो उन्हीं पर आधारित धारा 409 की दोषसिद्धि अस्थिर हो जाती है। अदालत ने Bhagwan Rama Shinde Gosai v. State of Gujarat पर भरोसा करते हुए कहा कि निश्चित अवधि की सजा पाए दोषी द्वारा अपील दायर किए जाने पर, अपवादात्मक परिस्थितियों के अभाव में सजा निलंबन पर उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
मौजूदा मामले में अदालत ने यह भी नोट किया कि सजा निश्चित अवधि (चार वर्ष) की है और 2025 में दाखिल अपील के शीघ्र सुनवाई की संभावना कम है। इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने अपील के निस्तारण तक सजा निलंबित कर दी।

