दिल्ली हाईकोर्ट ने 1988 की अपील में 6,290 दिनों की देरी माफ़ करने से इनकार किया, कहा- वकील से संपर्क टूटना देरी माफ़ करने का आधार नहीं
Shahadat
20 Sept 2026 5:23 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने 1988 में दायर अपील बहाल करने की मांग में 6,290 दिनों (यानी 17 साल से ज़्यादा) की देरी को माफ़ करने से इनकार किया। यह अपील 2002 में सुनवाई आगे न बढ़ाने (Non-Prosecution) के कारण खारिज कर दी गई थी। [2026 LiveLaw (Del) 874]
जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने कहा कि वकील से संपर्क टूट जाना इतनी लंबी देरी को माफ़ करने का आधार नहीं हो सकता और मुक़दमा करने वाला व्यक्ति केस को आगे बढ़ाने की पूरी ज़िम्मेदारी अपने पुराने वकील पर नहीं डाल सकता।
कोर्ट ने कहा कि मुक़दमा करने वाले का यह तर्क कि उसका अपने पिछले वकील से एक दशक से ज़्यादा समय तक संपर्क नहीं रहा, इतनी असाधारण देरी के लिए पर्याप्त कारण नहीं माना जा सकता।
अपील 1988 में स्वीकार की गई और 18 जुलाई व 25 जुलाई, 2002 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई। न तो अपीलकर्ता और न ही उसका वकील पेश हुआ, जिसके परिणामस्वरूप सुनवाई आगे न बढ़ाने के कारण अपील खारिज कर दी गई।
बहाली की मांग वाली अर्ज़ी 24 नवंबर, 2018 को दायर की गई और बाद में आपत्तियों को दूर करने के बाद जनवरी 2019 में इसे फिर से दायर किया गया।
मुक़दमा करने वाले ने देरी का मुख्य कारण अपने पिछले वकील से संपर्क टूटना, आर्थिक कठिनाइयाँ और खारिज होने से पहले नोटिस न मिलना बताया।
इस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा:
"मुक़दमा करने वाले की स्वतंत्र ज़िम्मेदारी है कि वह अपने मामले को तत्परता से आगे बढ़ाए और पूरी ज़िम्मेदारी अपने पुराने वकील पर नहीं डाल सकता।"
कोर्ट ने आगे कहा कि अपील खारिज होने के बाद अपीलकर्ता ने 16 साल से ज़्यादा समय तक कोई कदम नहीं उठाया।
कोर्ट ने कहा,
"6,290 दिनों की इतनी भारी देरी को व्यक्तिगत कठिनाई या बातचीत बंद होने जैसी सामान्य दलीलों से खत्म नहीं किया जा सकता।"
कोर्ट ने यह भी कहा कि आवेदक का व्यवहार अपने कानूनी उपायों को आगे बढ़ाने के प्रति "लापरवाही भरा रवैया" दिखाता है।
कोर्ट ने कहा,
"कोई पर्याप्त कारण न बताए जाने के कारण 6,290 दिनों की लंबी देरी को माफ़ करने का कोई आधार नहीं बनता। इसलिए वर्तमान अर्ज़ी खारिज की जाती है।"
Title: KRISHAN LAL v. INDERJEET SINGH & ANOTHER

