केंद्र के 'कोई तुरंत नुकसान नहीं' के आश्वासन के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने HPV वैक्सीनेशन ड्राइव पर रोक लगाने से इनकार किया
Shahadat
29 July 2026 6:38 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को किशोरियों को ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) वैक्सीन, गार्डसिल (Gardasil) देने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इससे कोई तुरंत नुकसान नहीं होता है।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए डेटा से पता चलता है कि कम उम्र की लड़कियों को यह वैक्सीन देने में कोई नुकसान नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि वह किशोरियों के लिए वैक्सीन शुरू करने के औचित्य के मुद्दे पर बाद में विचार करेगा, लेकिन अभी वैक्सीन देने पर रोक नहीं लगाई जाएगी।
कोर्ट ने टिप्पणी की,
"हो सकता है कि (HPV वैक्सीनेशन का) कोई दीर्घकालिक लाभ न हो, लेकिन इससे कोई तुरंत नुकसान भी नहीं है।"
बेंच एक PIL (जनहित याचिका) पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि वैक्सीनेशन प्रोग्राम माता-पिता की जानकारीपूर्ण सहमति और पर्याप्त वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित किए बिना लागू किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान, केंद्र की ओर से पेश ASG चेतन शर्मा ने कहा कि दुनिया भर में 55 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीनेशन से लाभ हुआ है।
जब ASG ने कहा कि सरकार संबंधित वैक्सीनेशन के दौरान उचित और पर्याप्त उपाय कर रही है तो कोर्ट ने कहा कि उसे HPV वैक्सीन देने को रोकने का कोई कारण नहीं दिखता।
डॉ. सुजाता मित्तल द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि यह प्रोग्राम किशोरियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, जिसमें भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत शारीरिक स्वायत्तता, जानकारीपूर्ण सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार शामिल हैं।
याचिका के अनुसार, प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी वैक्सीनेशन ड्राइव स्कूलों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों के माध्यम से लगभग 14 वर्ष की आयु की लड़कियों को लक्षित करती है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि माता-पिता की उचित जानकारीपूर्ण सहमति के बिना वैक्सीनेशन किया जा रहा है और दावा किया गया कि फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को एनरोलमेंट टारगेट दिए जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप कम उम्र की लड़कियों पर वैक्सीन लगवाने का अनुचित दबाव पड़ता है।
PIL में तमिलनाडु की एक 14 वर्षीय लड़की के मामले का भी जिक्र है, जिसे कथित तौर पर मार्च 2026 में HPV वैक्सीन लगवाने के बाद गंभीर मेडिकल जटिलताओं का सामना करना पड़ा था।
इसमें ग्वालियर और बिहार की ऐसी ही घटनाओं की रिपोर्ट का भी हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं वैक्सीन की सुरक्षा और वैक्सीनेशन के बाद की निगरानी के बारे में चिंताएं पैदा करती हैं।
याचिका में कहा गया,
"HPV यौन संपर्क से फैलता है। हालांकि इसके टाइप 16 और 18 सर्वाइकल कैंसर से जुड़े हैं, लेकिन ज़्यादातर संक्रमण अपने आप ठीक हो जाते हैं। HPV कई कारणों में से सिर्फ़ एक है; खराब साफ़-सफ़ाई, कम उम्र में शादी, कई बार गर्भवती होना, कई पार्टनर होना, धूम्रपान, गर्भनिरोधक गोलियां, कमज़ोर इम्यूनिटी और खराब पोषण जैसे अन्य कारण भी हैं, जिनका समाधान वैक्सीनेशन से नहीं होता है।"
इसमें यह भी कहा गया कि HPV वैक्सीनेशन प्रोग्राम को जिस तरह से लागू किया जा रहा है, उससे सहमति, सुरक्षा, वैज्ञानिक आधार और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।
Title: Dr. Sujata Mittal & Anr v. Union of India and Others


