दिल्ली हाईकोर्ट ने 'तिरछी टोपीवाले' पर कॉपीराइट विवाद में 'धुरंधर' फिल्म की OTT रिलीज़ रोकने से किया इनकार

Shahadat

15 May 2026 9:49 AM IST

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने तिरछी टोपीवाले पर कॉपीराइट विवाद में धुरंधर फिल्म की OTT रिलीज़ रोकने से किया इनकार

    दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को त्रिमूर्ति फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड को अंतरिम राहत देने से इनकार किया। यह राहत कंपनी ने अपने कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे में मांगी थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' में फिल्म 'त्रिदेव' के मशहूर गाने "तिरछी टोपीवाले" का बिना अनुमति के इस्तेमाल किया गया।

    जस्टिस तुषार राव गेडेला ने कहा कि अगर त्रिमूर्ति फिल्म्स अपने दावों के अनुसार अपने अधिकार साबित कर पाती है तो उन्हें हर्जाने के रूप में उचित मुआवज़ा हमेशा दिया जा सकता है।

    कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें प्रतिवादियों—जिनमें B62 स्टूडियोज़ प्राइवेट लिमिटेड, जियो स्टूडियोज़ और सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड (T-Series) शामिल हैं—के खिलाफ निषेधाज्ञा (injunction) की मांग की गई। यह मांग इसलिए की गई थी ताकि वे फिल्म में और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मूल गाने और उसके रीमिक्स संस्करण "रंग दे लाल (ओए ओए)" का इस्तेमाल न कर सकें।

    त्रिमूर्ति फिल्म्स ने दलील दी कि 1988 के एक समझौते के तहत सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज़ को केवल ऑडियो रिकॉर्ड बनाने और बेचने से जुड़े सीमित अधिकार ही दिए गए; उन्हें गाने को किसी दूसरी फिल्म में शामिल करने या उसके साथ सिंक्रोनाइज़ करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया।

    यह तर्क दिया गया कि 'धुरंधर: द रिवेंज' में बिना अनुमति के इस गाने का इस्तेमाल करना, गाने से जुड़े साहित्यिक, संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग कार्यों पर उनके कॉपीराइट का उल्लंघन माना जाएगा।

    इस याचिका का विरोध करते हुए प्रतिवादियों ने आरोप लगाया कि त्रिमूर्ति फिल्म्स ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और इस मामले में उनकी मौन सहमति (Acquiescence) रही है। उन्होंने बताया कि 'त्रिदेव' के गाने पहले भी 'अज़हर' और 'K.G.F: Chapter 1' जैसी फिल्मों में इस्तेमाल किए जा चुके हैं, लेकिन इस बात की जानकारी होने के बावजूद त्रिमूर्ति फिल्म्स ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की थी।

    कोर्ट ने 2016 में 'अज़हर' फिल्म में कथित उल्लंघन के संबंध में हुए नोटिसों का ज़िक्र किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि त्रिमूर्ति फिल्म्स ने न तो उन दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया और न ही अपनी शिकायत में उन कमियों या चूकों के बारे में कोई उचित स्पष्टीकरण दिया।

    तदनुसार, कोर्ट ने फिल्म की OTT रिलीज़ के खिलाफ कोई भी अंतरिम रोक लगाने से इनकार किया।

    अदालत ने कहा,

    “हालांकि वादी का यह तर्क सही हो सकता है कि अगर यह अदालत यह पाती है कि वादी के कॉपीराइट अभी भी मौजूद हैं तो सिनेमा हॉल में फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' के रिलीज़ होने के बावजूद, OTT प्लेटफॉर्म पर इसके रिलीज़ को रोकने के लिए एक अंतरिम आदेश अभी भी पारित किया जा सकता है। फिर भी इस अदालत की राय में, ऐसे तर्क को स्वीकार करने से एक बेतुकी स्थिति पैदा हो जाएगी।”

    अदालत ने त्रिमूर्ति के इस तर्क को खारिज किया कि अगर OTT प्लेटफॉर्म पर फिल्म के रिलीज़ पर रोक नहीं लगाई जाती है तो “कॉपीराइट के प्रथम दृष्टया साबित होने” के बावजूद, कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत लाइसेंसिंग व्यवस्था को नुकसान पहुंचेगा।

    अदालत ने कहा,

    “इसका कारण यह है कि इस अदालत द्वारा बनाई गई राय केवल प्रथम दृष्टया है और पक्षों को मुकदमे के दौरान कानून के अनुसार अपने अधिकारों को साबित करने का पर्याप्त और पूर्ण अवसर मिलेगा। यदि वादी अपने अधिकारों को साबित करने में सक्षम होता है तो निश्चित रूप से वादी का यह अधिकार कि वह किसी भी व्यक्ति से (जिसमें प्रतिवादी भी शामिल हैं) उससे अनुमति/लाइसेंस प्राप्त करने की मांग करे, वह सही साबित हो जाएगा। इस प्रकार, उपरोक्त कारण से, यह तर्क अस्वीकार्य है।”

    हालांकि, अदालत ने सुपर कैसेट्स को निर्देश दिया कि वह आज की तारीख से चार सप्ताह के भीतर अदालत में 50 लाख रुपये जमा करे।

    अदालत ने कहा कि यह जमा राशि रजिस्ट्रार जनरल के नाम पर की जाएगी, जो उक्त राशि को एक ब्याज-युक्त FDR (फिक्स्ड डिपॉज़िट) में निवेश करेंगे, जिसमें स्वतः नवीनीकरण का प्रावधान होगा; यह राशि मुकदमे के अंत में सफल पक्ष के लाभ के लिए काम आ सकती है।

    Title: TRIMURTI FILMS PRIVATE LIMITED v. B62 STUDIOS PRIVATE LIMITED & ORS

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