'कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं': दिल्ली हाईकोर्ट ने महिपालपुर में जलभराव और ट्रैफ़िक जाम को लेकर एजेंसियों को फटकार लगाई

  • कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट ने महिपालपुर में जलभराव और ट्रैफ़िक जाम को लेकर एजेंसियों को फटकार लगाई

    दिल्ली हाईकोर्ट ने शहर के महिपालपुर इलाके में लगातार हो रहे जलभराव और ट्रैफ़िक जाम को लेकर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI), दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) और अन्य एजेंसियों को फटकार लगाई। [2026 LiveLaw (Del) 881]

    जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की डिवीज़न बेंच ने कहा कि कई बैठकों और "बहुत ज़्यादा कागज़ी कार्रवाई" के बावजूद, इस समस्या को हल करने के लिए कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं की गई और न ही कोई समय-सीमा तय की गई।

    बेंच ने कहा कि एयरपोर्ट के पास और गुरुग्राम जाने वाली सड़क पर बार-बार होने वाले जलभराव के मामले में संबंधित एजेंसियों को गंभीरता से कदम उठाने की ज़रूरत है।

    कोर्ट ने कहा,

    "पिछले आदेश के बाद जो कई बैठकें हुईं... उनसे बहुत ज़्यादा कागज़ी कार्रवाई तो हुई, लेकिन ज़मीनी स्तर पर यह तय नहीं हुआ कि कौन सा काम किस एजेंसी या कंपनी को करना है। कोई समय-सीमा भी तय नहीं की गई।"

    कोर्ट एयरपोर्ट के पास स्थित इलाके महिपालपुर में गंभीर जलभराव के संबंध में नागरिक अधिकार समूह 'सोशल जूरिस्ट' द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है।

    बेंच ने पहले जलभराव से जुड़े अन्य मामले में बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित पक्षों - जैसे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ़ दिल्ली (MCD), दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA), NHAI, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) - के साथ बैठक करे और इलाके में स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (तूफानी पानी की निकासी के लिए नाला) बनाने की संभावना की जांच करे।

    इन निर्देशों के बाद 3 अगस्त को दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गई।

    बैठक में पाया गया कि एयरोसिटी इलाके में विकास कार्यों के कारण मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क की पानी ले जाने की क्षमता प्रभावित हुई, जिससे नजफगढ़ नाले में पानी के बहाव पर बुरा असर पड़ा है।

    इसके बाद मुख्य सचिव ने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे इंटीग्रेटेड ड्रेनेज कनेक्टिविटी सुनिश्चित करें ताकि आसपास के इलाकों और मुख्य रास्तों पर पानी जमा न हो।

    NHAI को यह भी निर्देश दिया गया कि वह DIAL और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर तकनीकी मूल्यांकन करे और स्थायी ड्रेनेज का प्रस्ताव पेश करे। DIAL ने NH-48 के किनारे शंकर विहार से रेडिसन सर्कल तक 3.5 किलोमीटर लंबा स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (तूफानी पानी की निकासी का नाला) बनाने का सैद्धांतिक वादा किया।

    इस बीच अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे पंप लगाएं और ड्रेनेज इनलेट (पानी निकासी के रास्ते) को साफ करें ताकि मॉनसून के दौरान जलभराव न हो।

    हाल की सुनवाई में कोर्ट ने देखा कि 4 अगस्त से 7 सितंबर के बीच हुई बैठकों के बाद बहुत सारा कागजी काम तो हुआ, लेकिन ज़मीनी स्तर पर यह तय नहीं किया गया कि कौन सा काम किस एजेंसी या कंपनी को करना है।

    बेंच ने कहा,

    "आज कोर्ट में NHAI का लापरवाह रवैया बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।"

    बेंच ने गौर किया कि NHAI का कोई अधिकारी मौजूद नहीं था और वर्चुअली पेश हुए उनके वकील अपनी बात रखने के लिए तैयार नहीं है और सिर्फ़ सुनवाई टालने की मांग कर रहे है।

    कोर्ट ने यह भी देखा कि DIAL 3.5 किलोमीटर लंबे स्टॉर्म वॉटर ड्रेन के अपने प्रस्ताव को "अच्छी नीयत वाला प्रस्ताव" बताकर सुनवाई टालने की मांग कर रहा है।

    दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल ने कोर्ट को बताया कि एयरोसिटी इलाके और NHAI नेशनल हाईवे पर हुए रीडेवलपमेंट (पुनर्विकास) के कारण महिपालपुर में जलभराव की समस्या हुई और इस इलाके में लगभग रोज़ाना भारी ट्रैफिक जाम की समस्या भी हो रही है।

    इस पर कोर्ट ने कहा कि महिपालपुर में जलभराव की तस्वीरों पर इन एजेंसियों की ओर से गंभीर प्रतिक्रिया आनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि कोई भी एजेंसी जलभराव या ट्रैफिक जाम की समस्या को ठीक करने की ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

    बेंच ने गौर किया कि हालांकि बैठकों के मिनट्स (कार्यवृत्त) में अलग-अलग एजेंसियों को कुछ काम सौंपे गए, लेकिन मुख्य शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म प्रस्ताव NHAI की ओर से आए और ऐसा लगता है कि वही एजेंसी इस इलाके के लिए ज़िम्मेदार है।

    कोर्ट ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे बैठकें करते रहें और अगली सुनवाई तक एक रिपोर्ट सौंपें। इस रिपोर्ट में उठाए जाने वाले शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कदमों और हर कदम के लिए ज़िम्मेदार एजेंसी या संस्था की जानकारी होनी चाहिए।

    कोर्ट ने निर्देश दिया कि मुख्य सचिव 15 अक्टूबर तक जो दो बैठकें बुलाएंगे, उनमें फ़ैसले लिए जाएं।

    अगली सुनवाई की तारीख, यानी 30 अक्टूबर तक, जिन एजेंसियों को ज़िम्मेदारी सौंपी गई, उन्हें उठाए जाने वाले कदमों और उनकी समय-सीमा की जानकारी देते हुए स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया।

    कोर्ट ने आगे निर्देश दिया,

    "इसके अलावा, महिपालपुर इलाके में बार-बार पानी भरने और ट्रैफ़िक जाम की समस्या को NHAI और DIAL को तेज़ी से हल करना होगा। उन्हें अगली सुनवाई की तारीख तक एक उचित प्रस्ताव पेश करना होगा, वरना कोर्ट को इस मामले में सख़्त निर्देश देने पड़ सकते हैं।"

    कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित एजेंसियों के सभी ज़िम्मेदार अधिकारी अगली सुनवाई की तारीख पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहें। साथ ही उनके वकील और ऐसे सक्षम अधिकारी भी वहां मौजूद रहें जो ज़िम्मेदारी ले सकें और कोर्ट के सवालों का जवाब दे सकें।

    इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

    Title: SOCIAL JURIST, A CIVIL RIGHTS GROUP v. UNION OF INDIA AND ORS

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