UPI धोखाधड़ी रोकने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश बनाने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस
Amir Ahmad
19 Feb 2026 11:20 AM IST

डिजिटल भुगतान प्रणाली में बढ़ती धोखाधड़ी के मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाइकोर्ट ने केंद्र सरकार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम से जवाब तलब किया। अदालत ने UPI के माध्यम से हो रहे वित्तीय अपराधों पर रोक लगाने और पीड़ितों को शीघ्र धनवापसी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश बनाने की मांग पर नोटिस जारी किया।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने वित्त मंत्रालय के माध्यम से केंद्र सरकार RBI तथा भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम से प्रतिक्रिया मांगी।
याचिका पंकज निगम द्वारा दायर की गई। इसमें कहा गया कि हाल के वर्षों में डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के मामलों में चौंकाने वाली वृद्धि हुई, जिससे आम नागरिकों की मेहनत की कमाई पर सीधा खतरा उत्पन्न हो गया।
याचिकाकर्ता का दावा है कि फरवरी 2024 में ऑनलाइन किराये का मकान तलाशते समय उनसे 1.24 लाख रुपये की ठगी की गई। शिकायत दर्ज कराने के बावजूद न तो धन की वसूली हुई और न ही आरोपियों का विवरण उपलब्ध कराया गया।
याचिका में अदालत से आग्रह किया गया कि सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को यह अनिवार्य किया जाए कि केवल पूर्ण केवाईसी वाले बैंक अकाउंट्स को ही UPI मंच से जोड़ने की अनुमति दी जाए।
इसके अलावा, एक समर्पित मंच तैयार करने की मांग की गई, जो राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पोर्टल को UPI अनुप्रयोगों, बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और दूरसंचार कंपनियों से जोड़ सके ताकि पीड़ित सरल और समयबद्ध तरीके से शिकायत दर्ज करा सकें।
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि 10 लाख रुपये तक की UPI धोखाधड़ी को ई-जीरो प्राथमिकी पहल के अंतर्गत शामिल किया जाए ताकि गंभीर ऑनलाइन वित्तीय अपराधों में स्वतः FIR दर्ज हो सके। साथ ही विभिन्न कानूनों और अधिकार क्षेत्र से जुड़ी जटिलताओं को दूर कर जांच प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाने के लिए मानक कार्यप्रणाली तैयार करने की मांग की गई।
हाइकोर्ट ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

