एयर इंडिया अहमदाबाद विमान हादसा: प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को रीड डाउन करने की याचिका खारिज
Amir Ahmad
25 Feb 2026 3:16 PM IST

दिल्ली हाइकोर्ट ने अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को रीड डाउन करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की। हाइकोर्ट ने कहा कि किसी विशेषज्ञ द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट को इस प्रकार पढ़कर सीमित या परिवर्तित करने की मांग करना न्यायिक अधिकार क्षेत्र के दायरे में नहीं आता।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि रीड डाउन का सिद्धांत आमतौर पर किसी कानून की व्याख्या करते समय अपनाया जाता है, न कि विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट पर। अदालत ने टिप्पणी की कि यह प्रार्थना पूरी तरह से गलत समझ पर आधारित है।
यह याचिका सुरेश चंद श्रीवास्तव द्वारा दायर की गई, जिन्होंने विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट में कुछ कथित कमियों का हवाला देते हुए उसे रीड डाउन करने की मांग की थी। उन्होंने दोनों इंजनों में ईंधन आपूर्ति बंद होने के सटीक समय, कट-ऑफ स्विच के रन से कट-ऑफ में परिवर्तन का समय और इंजनों के बंद होने के वास्तविक समय की पूरी जानकारी देने की मांग की थी।
गौरतलब है कि 12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन गैटविक जा रही एयर इंडिया की उड़ान संख्या एआई-171, बोइंग 787-8 विमान, उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में विमान में सवार सभी 270 लोगों की मृत्यु हो गई। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो द्वारा जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों इंजनों में ईंधन की आपूर्ति एक सेकंड के अंतराल में बंद हो गई।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालत याचिकाकर्ता की चिंताओं को समझती है लेकिन ऐसे तकनीकी और विशेषज्ञता से जुड़े मामलों को जनहित याचिका के माध्यम से चुनौती देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी विशेषज्ञ रिपोर्ट पर न्यायालय की टिप्पणी का व्यापक प्रभाव पड़ सकता है इसलिए इस क्षेत्र को विशेषज्ञों पर ही छोड़ना चाहिए।
जस्टिस कारिया ने भी कहा कि जांच एजेंसी द्वारा तैयार रिपोर्ट को अदालत द्वारा रीड डाउन नहीं किया जा सकता, क्योंकि न्यायपालिका इस विषय की विशेषज्ञ नहीं है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जांच अभी जारी है। यदि याचिकाकर्ता को कोई विशेष जानकारी चाहिए तो वह संबंधित प्राधिकरण से विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत संपर्क कर सकते हैं।
हाइकोर्ट ने यह भी कहा कि मांगी गई जानकारी के लिए सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदन किया जा सकता था। यदि वह जानकारी सार्वजनिक करने योग्य होती तो संबंधित प्राधिकरण उसे उपलब्ध कराता। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की मांग के लिए रिट याचिका का सहारा नहीं लिया जा सकता।
इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की।

