LPG की कमी पर हाईकोर्ट सख्त, जनहित याचिका खारिज कर कहा- यह कार्यपालिका का विषय
Amir Ahmad
22 April 2026 1:48 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में LPG की कथित कमी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह मुद्दा पूरी तरह कार्यपालिका के दायरे में आता है और अदालत इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि जब केंद्र सरकार पहले से ही स्थिति से निपटने के लिए कदम उठा रही है। तब अदालत किसी प्रकार का आदेश (मंडामस) जारी नहीं कर सकती।
यह याचिका वकील राकेश कुमार मित्तल ने दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आवश्यक वस्तु होने के बावजूद दिल्ली में LPG की भारी कमी है, जिससे लोगों को गैस सिलेंडर लेने में कठिनाई हो रही है और काला बाजारी में ऊंचे दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा,
“ऐसे सभी मुद्दे पूरी तरह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।”
अदालत ने यह भी कहा कि सरकार पहले से ही आपूर्ति और उत्पादन से जुड़ी आपात स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक प्रावधान कर चुकी है।
अदालत ने केंद्र सरकार और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि LPG सहित पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त कदम उठाए गए। हाल ही में जारी संशोधित आदेशों में भी उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और आपूर्ति की स्थिति सुधारने के उपाय शामिल हैं।
याचिकाकर्ता द्वारा सरकारी उपायों को अपर्याप्त बताए जाने पर अदालत ने कहा,
“ऐसी परिस्थितियों से निपटने के उपाय करना पूरी तरह कार्यपालिका का काम है।”
साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत रखने की अनुमति दी और भरोसा दिलाया कि उस पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने टिप्पणी की,
“क्या हम सरकार चला रहे हैं। यह नीति से जुड़ा मामला है। इसमें अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।”
अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में दखल देने से न्यायिक प्रक्रिया जटिल हो सकती है और ऐसे आदेश व्यावहारिक रूप से लागू भी नहीं हो पाएंगे।
अंत में हाईकोर्ट ने दोहराया कि सरकार स्थिति से निपटने के लिए कदम उठा रही है, इसलिए अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

