अमित शाह, राहुल गांधी और सांसदों के खिलाफ FIR की मांग खारिज: दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित याचिका ठुकराई

Amir Ahmad

15 July 2026 1:42 PM IST

  • अमित शाह, राहुल गांधी और सांसदों के खिलाफ FIR की मांग खारिज: दिल्ली हाईकोर्ट ने जनहित याचिका ठुकराई

    दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 106(2) को अधिसूचित नहीं किए जाने के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी तथा सभी सांसदों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज की।

    चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने वकील ऋतु गौबा द्वारा दायर याचिका को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता ने स्वयं अदालत में अपना पक्ष रखा।

    सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने अपनी दलीलों में राजनीतिक उदाहरण देने शुरू किए तो पीठ ने मौखिक रूप से कहा,

    "इसे राजनीतिक मुद्दा मत बनाइए।"

    याचिका में दिल्ली पुलिस को सभी सांसदों के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई। साथ ही आगामी मानसून सत्र में BNS की धारा 106(2) लागू कराने के लिए कदम उठाने का भी अनुरोध किया गया।

    याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि जब तक यह प्रावधान लागू नहीं होता तब तक सभी सांसदों पर जुर्माना लगाया जाए और उनके लिए आवंटित धनराशि में कटौती की जाए।

    धारा 106(2) सड़क दुर्घटना के ऐसे मामलों से संबंधित है, जिनमें चालक लापरवाही से किसी व्यक्ति की मौत का कारण बनने के बाद घटना की सूचना पुलिस या मजिस्ट्रेट को दिए बिना मौके से फरार हो जाता है।

    याचिका में कहा गया कि नागरिकों को सड़कों, फुटपाथों, राजमार्गों और फ्लाईओवर पर सुरक्षित जीवन का अधिकार है तथा सांसद जनता के प्रतिनिधि होने के नाते अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए बाध्य हैं।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि BNS, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम केवल पुराने कानूनों का नया रूप हैं।

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि BNS की धारा 1(2) के अनुसार कानून के विभिन्न प्रावधान अलग-अलग तिथियों पर अधिसूचित किए जा सकते हैं और यह निर्णय केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    कोर्ट ने कहा कि किसी प्रावधान को कब लागू किया जाए, यह पूरी तरह केंद्र सरकार के विवेक का विषय है। जब तक सरकार संबंधित अधिसूचना जारी नहीं करती, तब तक अदालत उस प्रावधान को लागू करने का निर्देश नहीं दे सकती।

    अन्य मांगों को भी अदालत ने अस्पष्ट और कानूनी आधार से रहित बताते हुए याचिका को निराधार मानकर खारिज किया।

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