खुर्रम परवेज और इरफान मेहराज की जमानत पर रोक से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार, लगाईं अतिरिक्त शर्तें

Amir Ahmad

21 July 2026 3:09 PM IST

  • खुर्रम परवेज और इरफान मेहराज की जमानत पर रोक से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार, लगाईं अतिरिक्त शर्तें

    दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून (UAPA) मामले में मानवाधिकार कार्यकर्ता खुर्रम परवेज और कश्मीरी पत्रकार इरफान मेहराज को मिली जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने दोनों आरोपियों पर कुछ अतिरिक्त और कड़ी शर्तें लागू की।

    जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ट्रायल कोर्ट ने UAPA की धारा 43डी(5) के प्रावधानों के अनुरूप आवश्यक निष्कर्ष दर्ज नहीं किए हैं। इसलिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अपील पर विचार किया जाना आवश्यक है।

    मामला अक्टूबर 2020 में दर्ज उस प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें NIA ने कुछ गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से कथित आतंकवाद के वित्तपोषण के आरोपों की जांच शुरू की थी।

    NIA ने पटियाला हाउस अदालत के प्रधान जिला एवं सत्र जज पितांबर दत्त द्वारा 18 जुलाई को पारित जमानत आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

    NIA की ओर से सीनियर एडवोकेट माधव खुराना ने दलील दी कि ट्रायल कोर्ट ने धारा 43डी(5) के तहत आवश्यक कानूनी परीक्षण किए बिना जमानत दी। उन्होंने कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपियों की रिहाई राष्ट्रीय सुरक्षा तथा राष्ट्रीय हित के लिए प्रतिकूल हो सकती है।

    वहीं, खुर्रम परवेज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने तर्क दिया कि जमानत आदेश में हस्तक्षेप केवल असाधारण परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपों पर विचार करने के बाद सख्त शर्तों के साथ जमानत दी है। उन्होंने यह भी बताया कि खुर्रम परवेज को इससे जुड़े एक अन्य मामले में भी दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही जमानत दे चुका है।

    सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपपत्र में उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों पर ट्रायल कोर्ट के आदेश में पर्याप्त चर्चा नहीं की गई।

    अदालत ने कहा,

    "ट्रायल कोर्ट कोई संवैधानिक अदालत नहीं है और उसे कानून के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए प्रथम दृष्टया निष्कर्ष दर्ज करने चाहिए। ऐसे निष्कर्षों के अभाव में इस अदालत द्वारा मामले पर विचार किया जाना आवश्यक है।"

    हालांकि हाईकोर्ट ने जमानत पर रोक लगाने से इनकार करते हुए दोनों आरोपियों पर अतिरिक्त शर्तें लगाईं।

    अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों आरोपी सप्ताह में दो बार जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होंगे। साथ ही वे जम्मू-कश्मीर सिविल सोसायटी संगठन अथवा उससे जुड़े किसी संगठन जैसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों अपने परिवार, रिश्तेदारों और करीबी मित्रों से मिल सकते हैं, लेकिन आरोपपत्र में नामित किसी भी व्यक्ति से संपर्क या मुलाकात नहीं करेंगे।

    हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में मुकदमे की कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 23 अगस्त को तय की।

    NIA का आरोप है कि वर्ष 2020 के इस मामले में घाटी के कुछ गैर-सरकारी संगठन, ट्रस्ट और संस्थाएं सामाजिक एवं जनकल्याण कार्यों की आड़ में धन एकत्र कर प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों तक पहुंचाने में संलिप्त थीं। खुर्रम परवेज पर वर्ष 2016 के कश्मीर आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को कथित रूप से भौतिक सहायता उपलब्ध कराने का भी आरोप है।

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