पत्नी का लगातार झगड़ना, पति के माता-पिता का विरोध और शारीरिक संबंध से इनकार 'क्रूरता': दिल्ली हाईकोर्ट

  • पत्नी का लगातार झगड़ना, पति के माता-पिता का विरोध और शारीरिक संबंध से इनकार क्रूरता: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि पत्नी का लगातार झगड़ना, पति द्वारा अपने माता-पिता की मदद का विरोध, अलग रहने के बावजूद विवाद जारी रखना और शारीरिक संबंधों से इनकार करना, परिस्थितियों के आधार पर वैवाहिक क्रूरता माना जा सकता है।

    जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की खंडपीठ ने पत्नी की अपील खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट द्वारा पति को दिए गए तलाक को बरकरार रखा। तलाक हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(ia) के तहत क्रूरता के आधार पर दिया गया था।

    पति ने आरोप लगाया था कि शादी की शुरुआत से ही पत्नी उससे और उसके माता-पिता से अक्सर झगड़ती थी। उसने पति के माता-पिता को सैलरी का हिस्सा देने का विरोध किया और संयुक्त परिवार के घर में अलग रसोई कर ली। बाद में दोनों दिल्ली में अलग रहने लगे, लेकिन विवाद जारी रहा।

    पत्नी ने पति पर मारपीट, शराब पीकर हिंसा करने और विवाहेतर संबंध रखने जैसे आरोप लगाए। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि विवाहेतर संबंधों के आरोप साबित नहीं हुए और इन्हें तलाक की कार्यवाही के बाद लगाया गया आरोप माना।

    कोर्ट ने संयुक्त परिवार के घर में पत्नी द्वारा अपना कमरा बंद रखने को भी ससुराल वालों को परेशान करने वाला कृत्य माना और इसे क्रूरता का हिस्सा बताया।

    पीठ ने कहा कि किसी पति या पत्नी से वैवाहिक जीवन में हुई हर घटना की डायरी रखने की उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत ने पाया कि पत्नी का कथित क्रूर व्यवहार लंबे समय तक जारी रहा, जिससे वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुका था और उसमें सुधार की कोई संभावना नहीं बची थी।

    इसी आधार पर हाईकोर्ट ने तलाक बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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