दिल्ली हाईकोर्ट ने मैनेजमेंट कोटा नियम को सही ठहराया, कहा- निजी कॉलेज CET पास छात्रों में से अलग मेरिट सूची बना सकते हैं

Praveen Mishra

3 July 2026 12:36 PM IST

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने मैनेजमेंट कोटा नियम को सही ठहराया, कहा- निजी कॉलेज CET पास छात्रों में से अलग मेरिट सूची बना सकते हैं

    दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली प्रोफेशनल कॉलेजेज या इंस्टीट्यूशंस रूल्स, 2007 के रूल 8(2)(a)(v) की वैधता बरकरार रखते हुए कहा कि निजी गैर-सहायता प्राप्त (Unaided) प्रोफेशनल संस्थान 10% मैनेजमेंट कोटा सीटों (MQS) पर प्रवेश के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) पास उम्मीदवारों में से अपनी अलग मेरिट सूची तैयार कर सकते हैं।

    चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने कहा कि यह नियम दिल्ली प्रोफेशनल कॉलेजेज या इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2007 की योजना के अनुरूप है और उसके किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं करता।

    यह फैसला 'जस्टिस फॉर ऑल' द्वारा दायर जनहित याचिका पर आया, जिसमें रूल 8(2)(a)(v) और शैक्षणिक सत्र 2026-27 के एडमिशन ब्रोशर को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि CET में केंद्रीकृत काउंसलिंग भी शामिल है, इसलिए निजी संस्थानों द्वारा मैनेजमेंट कोटा के लिए अलग मेरिट सूची तैयार करना कानून के विपरीत है।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 12 और 13 के अनुसार 90% सीटें केंद्रीकृत काउंसलिंग से भरी जाती हैं, जबकि 10% मैनेजमेंट कोटा सीटों पर संबंधित संस्थान स्वयं विज्ञापन जारी कर CET पास उम्मीदवारों में से प्रवेश दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता की दलील स्वीकार कर ली जाए तो मैनेजमेंट कोटा से संबंधित वैधानिक प्रावधान ही निष्प्रभावी हो जाएगा।

    हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निजी संस्थानों द्वारा मैनेजमेंट कोटा प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता या निष्पक्षता को लेकर कोई शिकायत है, तो उसे एडमिशन रेगुलेटरी कमेटी (ARC) के समक्ष उठाया जा सकता है। इसी के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर ARC के समक्ष प्रतिनिधित्व देने की स्वतंत्रता दी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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