वैवाहिक विवाद से जुड़ी खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग: दिल्ली हाईकोर्ट ने IPS अधिकारी की याचिका पर जारी किया नोटिस
Shahadat
3 July 2026 8:47 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कार्यरत भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी की याचिका पर नोटिस जारी किया। अधिकारी ने अपने वैवाहिक विवाद से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट को हटाने और डी-इंडेक्स करने की मांग की है; यह विवाद बाद में आपसी सहमति से सुलझा लिया गया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा Google LLC और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थीं।
कोर्ट ने कहा कि उसे इस याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन) है, क्योंकि Google LLC, YouTube LLC के रेजिडेंट शिकायत अधिकारी और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
IPS अधिकारी ने तर्क दिया कि हालांकि वैवाहिक विवाद सुलझ गया था और उनकी पत्नी की शिकायत पर दर्ज FIR को तेलंगाना हाईकोर्ट ने 2024 में समझौते के आधार पर रद्द कर दिया था, फिर भी कई ऑनलाइन समाचार रिपोर्ट और वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं।
याचिका के अनुसार, कई समाचार चैनलों ने विवाद को सनसनीखेज बनाकर रिपोर्ट प्रकाशित की थीं और एक IPS ट्रेनी के तौर पर उनकी पहचान उजागर की थी, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और निजता (प्राइवेसी) पर बुरा असर पड़ा।
उन्होंने Google LLC, Google India Private Limited, YouTube LLC और X Corp को विवाद से जुड़े डिजिटल कंटेंट को हटाने, डिलीट करने, डी-इंडेक्स करने और उसका एक्सेस बंद करने का निर्देश देने की मांग की।
याचिका में लिंक को स्थायी रूप से डी-इंडेक्स करने और इसी तरह के कंटेंट को दोबारा प्रकाशित होने से रोकने के लिए हैश-मैचिंग टेक्नोलॉजी जैसे उपाय अपनाने का निर्देश देने की भी मांग की गई।
संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने 'लक्ष वीर सिंह यादव बनाम भारत संघ' मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र किया, जिसमें कोर्ट ने "भूल जाने के अधिकार" (right to be forgotten) को निजता की संवैधानिक गारंटी का हिस्सा माना था।
याचिका का विरोध करते हुए Google LLC के वकील ने तर्क दिया कि IPS अधिकारी तेलंगाना के निवासी हैं और विवादित कंटेंट में मुख्य रूप से तेलुगु मीडिया आउटलेट्स द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट शामिल थीं।
यह भी कहा गया कि मामले का मुख्य कारण तेलंगाना में उत्पन्न हुआ। इसलिए याचिकाकर्ता को तेलंगाना हाईकोर्ट जाना चाहिए।
तर्कों पर विचार करने के बाद जस्टिस शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत प्रकाशकों के खिलाफ राहत नहीं मांग रहा था, बल्कि मध्यस्थ प्लेटफॉर्म और अधिकारियों के खिलाफ सामूहिक राहत की मांग कर रहा था। कोर्ट ने कहा कि विवादित रिपोर्ट सिर्फ़ तेलुगु भाषा के प्रकाशनों तक ही सीमित नहीं थीं, बल्कि टाइम्स ऑफ़ इंडिया, द हिंदू, NDTV और News18 जैसे राष्ट्रीय मीडिया हाउस की अंग्रेज़ी भाषा की रिपोर्ट भी दिल्ली समेत पूरे देश में उपलब्ध थीं।
कोर्ट ने कहा,
"इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई का कोई कारण (cause of action) नहीं बना है।"
अब इस मामले की सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
Case Title: KR v. Google LLC & Ors.


