शराब नीति मामला: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग वाली केजरीवाल की याचिका पर नोटिस जारी

Shahadat

6 April 2026 3:28 PM IST

  • शराब नीति मामला: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग वाली केजरीवाल की याचिका पर नोटिस जारी

    दिल्ली हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की उस अर्जी पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने शराब नीति मामले से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के हटने की मांग की थी।

    दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को CBI को नोटिस जारी किया। यह नोटिस दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल की उस अर्जी पर जारी किया गया, जिसमें उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के मामले से हटने की मांग की थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा अभी CBI की उस याचिका पर सुनवाई कर रही हैं, जिसमें कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में केजरीवाल को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई।

    कोर्ट CBI की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसके तहत केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और इस मामले में नामजद कई अन्य लोगों को बरी कर दिया गया।

    सुनवाई की शुरुआत में पूर्व मुख्यमंत्री (खुद कोर्ट में पेश हुए) ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने यह बात रखी कि उन्होंने अर्जी दाखिल की, जिसमें उन्होंने जस्टिस के मामले से हटने की मांग की और इस अर्जी को रिकॉर्ड पर लिया जाए।

    हालांकि, CBI की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें जस्टिस शर्मा के मामले से हटने की मांग वाली सात अर्जियां मिली हैं।

    उन्होंने कहा,

    "यह बहुत गंभीर मामला है। इस देश में कुछ लोग गंभीर आरोप लगाकर ही अपना करियर बनाते हैं। ये आरोप एक संस्था पर लगाए जा रहे हैं और हम इस संस्था का पूरा समर्थन करेंगे।"

    सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा कि एजेंसी को इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि केजरीवाल खुद कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखें।

    हालांकि, उन्होंने कहा,

    "उन्होंने (केजरीवाल ने) एक वकील भी नियुक्त किया हुआ। उन्होंने उस वकील को हटाया नहीं। अगर उन्हें खुद पेश होना है तो उनके वकील पेश नहीं हो सकते; ऐसे में अब से उन्हें खुद ही पेश होना चाहिए।"

    उन्होंने आगे कहा,

    "अगर कोई और भी इस मामले में शामिल होना चाहता है तो उन्हें एक हफ्ते का समय दिया जा सकता है। फिर सभी को एक साथ ही पेश होना चाहिए। अगर आपकी अदालत (जज साहब) जस्टिस के मामले से हटने वाली अर्जी को स्वीकार कर लेती है, तो भी कम से कम मामले से जुड़ी लिखित दलीलें (Pleadings) तो पूरी हो जानी चाहिए। एक-दो लोगों को छोड़कर किसी ने भी अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। अगर जस्टिस के मामले से हटने वाली अर्जियों को खारिज कर दिया जाता है तो इसे कोर्ट की अवमानना ​​माना जाएगा।"

    इस मौके पर केजरीवाल ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने जस्टिस के मामले से हटने वाली अर्जी हाईकोर्ट की तय प्रक्रिया के अनुसार ही दाखिल की। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि उनकी इस अर्जी को रिकॉर्ड पर लिया जाए, क्योंकि एक याचिकाकर्ता के तौर पर उन्हें (जो खुद अपना केस लड़ रहे हैं) ई-फाइलिंग करने की अनुमति नहीं है।

    इसके बाद कोर्ट ने केजरीवाल से मौखिक रूप से पूछा कि क्या वह अपनी अर्जी पर खुद ही बहस करेंगे? इस पर केजरीवाल ने 'हां' में जवाब दिया।

    इसके बाद कोर्ट ने नोटिस जारी किया और कहा,

    "प्रतिवादी नंबर 18 (केजरीवाल) खुद पेश हुए। यह कोर्ट इस अर्जी को रिकॉर्ड पर लेती है। रजिस्ट्री इसे डिजिटल रूप से रिकॉर्ड पर ले सकती है। कॉपी मिल गई। अगर कोई जवाब देना है तो उसे दाखिल किया जाए। एडवांस कॉपी दी जाए। दोनों पक्ष अपनी लिखित दलीलें दाखिल कर सकते हैं। अगर कोई और भी खुद को केस से अलग करने (Recusal) के लिए अर्जी दाखिल करना चाहता है तो कृपया ऐसा करे, ताकि मैं इस पर एक ही बार में फैसला कर सकूं।"

    इसके बाद कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 13 अप्रैल को दोपहर 2:30 बजे तय की। कोर्ट को यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई वह रिट याचिका वापस ले ली गई, जिसमें केस को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की गई।

    जस्टिस शर्मा ने अन्य आरोपियों द्वारा दाखिल की गई, खुद को केस से अलग करने वाली अर्जियों पर भी नोटिस जारी किया।

    बता दें, केजरीवाल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मांग की थी कि इस केस को जस्टिस शर्मा से लेकर किसी दूसरे जज को सौंप दिया जाए। हालांकि, इस अनुरोध को ठुकरा दिया गया था। इसके बाद AAP नेता ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल करके केस को ट्रांसफर करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

    Case Title: CBI v. Kuldeep Singh & Ors

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