AAP MLA कुलदीप कुमार की कथित गैर-कानूनी हिरासत का मामला दिल्ली हाईकोर्ट ने बंद किया, पुलिस ने कहा- उन्हें रिहा कर दिया गया
Shahadat
18 Aug 2026 8:32 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार (18 अगस्त) को आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप कुमार की कथित गैर-कानूनी हिरासत के मामले में दायर 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका को बंद कर दिया। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उन्हें उसी दिन पहले ही रिहा कर दिया गया।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने गौर किया कि कुमार को 18 अगस्त को दोपहर करीब 3:48 बजे रिहा कर दिया गया और कहा कि उनकी रिहाई के साथ ही इस याचिका का मकसद पूरा हो गया।
इस मामले का ज़िक्र सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने दिन में पहले कोर्ट के सामने किया। उन्होंने कहा कि कुमार को कथित तौर पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों ने उनके घर से तब उठाया था, जब वे सुबह करीब 4 बजे सो रहे थे। फरासत ने बताया कि कुमार अपने इलाके में एक सफाई कर्मचारी की मौत के बाद से मुआवज़े की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।
सुनवाई के दौरान फरासत ने तर्क दिया,
"सुबह 4:00 बजे उन्हें घर पर सोते समय उठा लिया गया... सादे कपड़ों में 20-25 पुलिसकर्मियों ने उन्हें उठाया और फ़ोन भी नहीं लेने दिया... दिन भर उनसे संपर्क नहीं हो पाया, जब तक कि हमने चीफ जस्टिस के सामने मामला नहीं रखा... अब वे हमें बता रहे हैं कि उन्हें रिहा कर दिया गया... वह (कुमार) उस (सफाई कर्मचारी) के लिए मुआवज़ा दिलाने के मकसद से विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। क्या यह 'प्रिवेंटिव डिटेंशन' (एहतियाती हिरासत) के तहत इतनी सख़्त कार्रवाई का कारण हो सकता है?"
प्रतिवादियों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट के सामने मधु विहार पुलिस स्टेशन की 'जनरल डायरी' की कॉपी रखी और बताया कि कुमार को आज दोपहर 3:48 बजे रिहा कर दिया गया।
'हेबियस कॉर्पस' याचिका को बंद करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कुमार अन्य राहतों के लिए उचित कानूनी उपाय अपना सकते हैं।
इसके बाद फरासत ने कहा कि कुमार कथित गैर-कानूनी हिरासत और अपनी संपत्ति को हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा पाने के वास्ते उचित कदम उठाएंगे।
एडवोकेट ऋषिकेश कुमार द्वारा दायर याचिका में दावा किया गया कि मंगलवार सुबह करीब 4:00 बजे, सादे कपड़ों में 20-25 लोगों ने - जिन्होंने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया - पूर्वी दिल्ली से मौजूदा विधायक कुलदीप कुमार के घर पर छापा मारा था। आरोप है कि इनमें से कोई भी व्यक्ति वर्दी में नहीं था और न ही किसी के पास नेम प्लेट या बैज था। साथ ही याचिकाकर्ता या उनके परिवार के सदस्यों को कोई वारंट, आदेश या रिकॉर्ड नहीं दिखाया गया, जिससे उनकी पहचान या उनके काम करने के अधिकार का पता चल सके। आरोप है कि ये लोग जबरन कुलदीप कुमार को अपने साथ किसी अज्ञात जगह पर ले गए।
वहाँ से जाने से पहले, इन लोगों ने कथित तौर पर घर पर लगे CCTV कैमरे तोड़ दिए और CCTV सिस्टम का DVR (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) भी अपने साथ ले गए।
याचिका में दावा किया गया कि कुलदीप कुमार को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने का एकमात्र कारण यह है कि वह उन सफाई कर्मचारियों का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहे थे जो एक मृत कर्मचारी के परिवार के लिए मुआवज़े की मांग कर रहे थे, और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से प्रदर्शनकारियों से मिलने का आग्रह कर रहे थे।
सुबह से ही कुमार का कोई पता नहीं है और परिवार के सदस्यों ने दिल्ली पुलिस से पूछताछ भी की, लेकिन उनकी हिरासत, उसके कारणों या उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
Case title: Deepa wife of Kuldeep Kumar v/s State of NCT of Delhi


