गिरफ्तारी के आधार न बताना अवैध: दिल्ली हाईकोर्ट

Praveen Mishra

4 March 2025 7:16 PM IST

  • गिरफ्तारी के आधार न बताना अवैध: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में एक व्यक्ति की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया। अदालत ने पाया कि न तो अरेस्ट मेमो में "गिरफ्तारी के आधार" का कॉलम था और न ही गिरफ्तारी के समय उसे अलग से यह आधार बताए गए थे।

    जस्टिस विकास महाजन ने कहा कि गिरफ्तारी अमान्य मानी जाएगी क्योंकि CrPC की धारा 50 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के आधार आरोपी को नहीं बताए गए थे।

    कोर्ट ने कहा "अब वर्तमान मामले के तथ्यों पर आते हैं, अरेस्ट मेमो के अवलोकन से पता चलता है कि इसमें 'गिरफ्तारी के कारण' के लिए एक कॉलम है, जिसमें लिखा गया है 'निष्पक्ष जांच के उद्देश्य से'। लेकिन न तो गिरफ्तारी मेमो में 'गिरफ्तारी के आधार' के लिए कोई कॉलम है और न ही अभियोजन पक्ष का यह कहना है कि 'गिरफ्तारी के आधार' को आरोपी को गिरफ्तारी के समय अलग से बताया गया था,"

    अदालत ने उल्लेख किया कि, "बल्कि, अपर लोक अभियोजक ने स्वयं स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए थे।"

    जस्टिस महाजन ने आरोपी गगन को रिहा करने का आदेश दिया। गगन के खिलाफ पिछले साल IPC की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 34 (साझा इरादा) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह मामला एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज किया गया था, जिसने अपने मृतक चचेरे भाई का एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें वह कह रहा था कि गगन और अन्य आरोपियों द्वारा परेशान किए जाने के कारण उसने जहर खा लिया था।

    उसकी गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए, अदालत ने इस विषय पर विभिन्न न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया और कहा कि जांच अधिकारी को गिरफ्तार व्यक्ति को लिखित रूप में गिरफ्तारी के आधार उसी समय या अरेस्ट मेमो जारी करने के साथ ही सौंपने चाहिए।

    कोर्ट ने कहा, "याचिकाकर्ता 08.08.2024 से हिरासत में है और आरोप पत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है, इसलिए अब किसी भी उद्देश्य के लिए उसकी हिरासत आवश्यक नहीं है। इसके अलावा, आरोपित अपराध के लिए कोई न्यूनतम सजा निर्धारित नहीं है और याचिकाकर्ता का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। ये सभी कारक याचिकाकर्ता के हित में जाते हैं।"

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story