दिल्ली हाईकोर्ट ने विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए ताहिर हुसैन को कस्टडी पैरोल दी

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए ताहिर हुसैन को कस्टडी पैरोल दी

    दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को आगामी विधानसभा चुनाव में मुस्तफाबाद निर्वाचन क्षेत्र से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पार्टी के सदस्य के रूप में नामांकन पत्र दाखिल करने और शपथ लेने के लिए कस्टडी पैरोल प्रदान की।

    जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने राज्य को संबंधित तिथि पर नामांकन पत्र दाखिल करने की सुविधा प्रदान करने और चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले और बाद में औपचारिकताओं को पूरा करने की सुविधा प्रदान करने का निर्देश दिया।

    न्यायालय ने कहा,

    "राज्य संबंधित अधिकारियों के साथ तदनुसार समन्वय कर सकता है ताकि पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके और आवेदक/याचिकाकर्ता के नामांकन दाखिल करने के अधिकार पर किसी भी तरह से असर न पड़े।"

    चुनाव में नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 जनवरी है। नामांकन की जांच की तिथि 18 जनवरी है। मतदान की तिथि पांच फरवरी है।

    जस्टिस कृष्णा ने आदेश दिया है कि हुसैन को फोन, चाहे वह मोबाइल हो या लैंडलाइन या इंटरनेट, तक पहुंच नहीं होगी। उन्हें नामांकन प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों के अलावा किसी भी व्यक्ति से बातचीत नहीं करने का भी निर्देश दिया गया है।

    न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि हुसैन मीडिया को संबोधित नहीं करेंगे और उनके परिवार के सदस्य मौजूद रह सकते हैं, लेकिन उन्हें नामांकन दाखिल करने की तस्वीरें क्लिक करने या सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की अनुमति नहीं होगी।

    न्यायालय ने कहा, "पूर्ववर्ती घटनाओं, आरोपों की प्रकृति और परिस्थितियों की समग्रता को ध्यान में रखते हुए, उन्हें शपथ लेने और नामांकन पत्र दाखिल करने के संबंध में औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कस्टडी पैरोल दी जाती है।"

    दिल्ली पुलिस ने हुसैन की अंतरिम जमानत याचिका का विरोध किया, लेकिन यह रुख अपनाया कि वह हुसैन को अपेक्षित औपचारिकताओं का पालन करने, नामांकन पत्र दाखिल करने और अपना बैंक खाता खोलने में सहयोग करने और समर्थन देने के लिए तैयार है, जिसके लिए उसे हिरासत पैरोल दी जा सकती है।

    जस्टिस कृष्णा ने कहा कि हुसैन के खिलाफ आरोपों की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि वह दंगों का मुख्य अपराधी है। उन दंगों में लगभग 59 लोगों की मौत हो गई थी।

    न्यायालय ने कहा, "केवल इसलिए कि आवेदक/याचिकाकर्ता पहले नगर पार्षद रह चुका है, उसे अंतरिम जमानत देने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है।"

    कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में हुसैन की अंतरिम जमानत याचिका का निपटारा कर दिया। एक समन्वय पीठ ने पिछले साल 24 दिसंबर को मामले में हुसैन की नियमित जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया था।

    परिस्थितियों में भौतिक परिवर्तन की कमी के कारण हुसैन को 03 दिसंबर को ट्रायल कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। मृतक के पिता की शिकायत के आधार पर दयालपुर थाने में एफआईआर 65/2020 दर्ज की गई थी।

    जब उनका बेटा दंगों के दौरान लापता हो गया था, तब उन्होंने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अंकित का शव बाद में एक नाले से बरामद किया गया था। उसे जीटीबी अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया था।

    शिकायतकर्ता का बेटा अंकित शर्मा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो में कार्यरत है, किराने का सामान और सामान्य घरेलू सामान खरीदने के लिए उक्त तिथि को शाम करीब 5 बजे अपने घर से निकला था। हालांकि, वह कई घंटों के बाद भी घर नहीं लौटा।

    बाद में, उसका शव चांद बाग पुलिया के पास एक नाले में पड़ा मिला। उसके सिर, चेहरे, छाती, पीठ और कमर पर तेज चोटें आई थीं। इसके बाद, शिकायतकर्ता ने एक एफआईआर दर्ज की जिसमें कहा गया कि उसे पूरा संदेह है कि उसके बेटे की हत्या मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने की है।

    मृतक अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि धारदार हथियार और कुंद बल के कारण 51 चोटें आई थीं। पिछले साल मार्च में ट्रायल कोर्ट ने ताहिर हुसैन, हसीन, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम और मुंतजिम के खिलाफ आरोप तय किए थे।

    भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 147, 148, 153ए, 302, 365, 120बी, 149, 188 और 153ए के तहत आरोप तय किए गए थे। हुसैन पर आईपीसी की धारा 505, 109 और 114 के तहत भी आरोप लगाए गए थे। आरोपी नाजिम पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत भी आरोप लगाए गए थे।

    केस टाइटलः ताहिर हुसैन बनाम राज्य

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