फर्जी गैंगरेप केस में फंसाने और हिरासत में प्रताड़ना: वकील व पुलिसकर्मी की सजा बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट

Praveen Mishra

5 April 2026 1:22 PM IST

  • फर्जी गैंगरेप केस में फंसाने और हिरासत में प्रताड़ना: वकील व पुलिसकर्मी की सजा बरकरार, दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वकील और पुलिसकर्मी की सजा और दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए कहा कि पद और अधिकार का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त संदेश जाना चाहिए।

    जस्टिस चन्द्रशेखरन सुधा ने कहा कि अदालतें ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरत सकतीं, जहां वकील और पुलिस जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने अधिकारों का दुरुपयोग करें।

    मामला क्या था?

    मृतक सुशील गुलाटी को 2000 में एक फर्जी गैंगरेप केस में फंसाया गया था। बाद में डीएनए जांच में यह साबित हुआ कि अपराध किसी अन्य व्यक्ति ने किया था, जिसके बाद गुलाटी को बरी कर दिया गया। हालांकि, इस दौरान उन्हें पुलिस हिरासत में प्रताड़ना और मारपीट का सामना करना पड़ा। उनकी 2014 में मृत्यु हो गई।

    ट्रायल कोर्ट ने 2016 में संबंधित वकील और सब-इंस्पेक्टर को दोषी ठहराते हुए 4 साल की सजा और ₹1.5 लाख-₹1.5 लाख का जुर्माना लगाया था।

    हाईकोर्ट का अवलोकन:

    कोर्ट ने कहा कि गुलाटी को झूठे केस में फंसाया गया और उन्हें लगातार कोर्ट में बुलाकर परेशान किया गया, लेकिन उनका क्रॉस-एग्जामिनेशन नहीं किया गया। यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

    अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी पक्ष का यह तर्क कि उन्हें यह नहीं पता था कि गवाह की मृत्यु हो जाएगी, “असंवेदनशील” है। कोर्ट ने कहा कि समय रहते गवाह का परीक्षण किया जा सकता था, लेकिन जानबूझकर देरी की गई।

    फैसला:

    हाईकोर्ट ने वकील और पुलिसकर्मी की सजा बरकरार रखी और उनकी अपील खारिज कर दी। साथ ही, मुआवजे की राशि बढ़ाते हुए निर्देश दिया कि ₹3 लाख की पूरी राशि मृतक के परिजनों को दी जाए।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story