क्या चुनाव आयोग जो चाहे वह कर सकता है? शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी पर दिल्ली हाईकोर्ट का सवाल, आयोग से मांगा जवाब
Amir Ahmad
24 July 2026 4:17 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) और गणनाकर्मी के रूप में तैनाती को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल किया कि क्या संविधान के अनुच्छेद 324 के आधार पर चुनाव आयोग "जो चाहे वह कर सकता है?"
चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने चुनाव आयोग को सोमवार तक संक्षिप्त शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को तय की।
यह जनहित याचिका एडवोकेट राजेश कुमार गोगना और एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने दायर की।
याचिका में कहा गया कि बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षकों को चुनाव संबंधी कार्यों में लगाने से स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई और इससे विद्यार्थियों के शिक्षा के अधिकार पर भी असर पड़ा है।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से एडवोकेट संजय वशिष्ठ ने अदालत को बताया कि आयोग ने शिक्षकों को केवल स्कूल समय समाप्त होने के बाद या अवकाश के दिनों में ही SIR का कार्य करने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की आपत्तियों के बाद आयोग ने यह व्यवस्था की ताकि नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो।
उन्होंने अदालत को बताया कि यह प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है और यह सुनिश्चित करने का हर संभव प्रयास किया गया कि शिक्षकों की नियमित कक्षाएं प्रभावित न हों।
याचिका में आरोप लगाया गया कि कई सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में नियमित शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर भेज दिया गया, जिसके कारण कक्षाएं अतिथि शिक्षकों या अन्य विषयों के शिक्षकों के भरोसे चल रही हैं। वहीं निजी स्कूलों में पढ़ाई सामान्य रूप से जारी है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि किसी भी स्कूल के 10 प्रतिशत से अधिक नियमित शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर तैनात करने के आदेश रद्द किए जाएं।
साथ ही यह भी निर्देश दिया जाए कि शिक्षकों से चुनाव संबंधी कार्य केवल स्कूल समय के बाद या छुट्टियों में ही कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक शिक्षकों की व्यवस्था की जाए।


