दिल्ली हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना मामले में वकील को आरोप मुक्त किया, भविष्य में आक्रामक व्यवहार न करने को कहा
Avanish Pathak
13 Feb 2025 8:31 AM

दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक वकील को आपराधिक अवमानना मामले में आरोप मुक्त कर दिया है और उसे भविष्य में आक्रामक व्यवहार न करने को कहा है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस धर्मेश शर्मा की खंडपीठ ने मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया और वकील की माफी स्वीकार कर ली।
पटियाला हाउस कोर्ट के पारिवारिक न्यायालयों के प्रधान न्यायाधीश द्वारा पिछले साल अक्टूबर में एक आदेश पारित किए जाने के बाद अवमानना कार्यवाही अदालत को सौंपी गई थी। वकील के खिलाफ आरोप यह था कि उसने वैवाहिक मामले में कार्यवाही के दौरान पारिवारिक न्यायालय के साथ दुर्व्यवहार किया था।
09 दिसंबर, 2024 को वकील को कारण बताने के लिए बुलाया गया था कि उसके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। 22 जनवरी को वकील ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने कहा कि उनकी एकमात्र चिंता यह है कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 के तहत आवेदन पर फ़ैमिली कोर्ट द्वारा निर्णय लिया जाना चाहिए।
अदालत को सूचित किया गया कि वकील एक गंभीर चिकित्सा स्थिति से भी पीड़ित है, जिसके लिए वह उपचार करवा रहा था। वकील ने कहा कि उसे आमतौर पर अवमानना के ऐसे किसी भी आरोप का सामना नहीं करना पड़ता है और उसने हमेशा अदालतों के सामने अच्छा व्यवहार किया है।
अदालत ने कहा, "जिस आदेश के तहत अवमानना का संदर्भ दिया गया है, उसे पढ़ने और बिना शर्त माफ़ी मांगने के बाद, जो आज पेश की गई है और प्रतिवादी की चिकित्सा स्थिति पर विचार करने के बाद, अदालत मामले पर सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण रखती है और प्रतिवादी की माफ़ी स्वीकार करती है।"
निर्णय में आगे कहा गया, "प्रतिवादी, जो एक वकील है, भविष्य में यह सुनिश्चित करेगा कि वह अदालत में इस तरह के किसी भी आक्रामक व्यवहार में शामिल न हो। कार्यवाही बंद की जाती है और अवमानना नोटिस को खारिज किया जाता है।"
केस टाइटलः कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन बनाम प्रशांत जैन