दिल्ली हाईकोर्ट ने DDA को फ्रीहोल्ड कन्वर्ज़न के पेंडिंग आवेदनों पर दो महीने में कार्रवाई करने का निर्देश दिया
Shahadat
30 Sept 2026 8:02 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) को निर्देश दिया कि वह राजधानी के निवासियों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए प्रॉपर्टी को लीज़होल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के सभी पेंडिंग आवेदनों पर दो महीने के अंदर कार्रवाई करे।
जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की डिवीज़न बेंच ने निर्देश दिया कि सभी पेंडिंग आवेदनों पर उसी पॉलिसी के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए जो आवेदन दाखिल करने की तारीख पर लागू थी।
कोर्ट ने हाउसिंग और अर्बन अफेयर्स मिनिस्ट्री (MoHUA) और DDA को नए आवेदनों पर कार्रवाई के लिए पॉलिसी बनाने और सुनवाई की अगली तारीख तक उसे कोर्ट के सामने पेश करने का भी निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा,
"इस कोर्ट ने MoHUA और DDA समेत संबंधित अधिकारियों को बार-बार प्रॉपर्टी को लीज़होल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के महत्व और दिल्ली के निवासियों को हो रही भारी दिक्कतों के बारे में बताया। यह स्थिति उन प्रॉपर्टी मालिकों के मामले में और भी गंभीर हो जाती है, जिन्होंने पहले ही आवेदन दाखिल कर दिए और उस समय लागू कन्वर्ज़न शुल्क का भुगतान किया और अब वे DDA के फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं।"
यह निर्देश तब आया जब बेंच को बताया गया कि लीज़होल्ड प्रॉपर्टी को फ्रीहोल्ड प्रॉपर्टी में बदलने की पॉलिसी को अंतिम रूप देने के लिए अधिकारियों को कम से कम दो महीने और शायद चार महीने लगेंगे।
देरी पर असंतोष जताते हुए कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति से दिल्ली में कन्वर्ज़न की प्रक्रिया पूरे एक साल के लिए ठप हो जाएगी।
बेंच ने कहा,
"कोर्ट की राय में यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।"
कोर्ट ने गौर किया कि जुलाई से बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद, अधिकारियों ने पॉलिसी को अंतिम रूप देने में कोई खास प्रगति नहीं की। इसने MoHUA द्वारा दाखिल हलफनामे पर भी असंतोष जताया, जिसमें पॉलिसी को अंतिम रूप देने के लिए कोई ठोस समय-सीमा नहीं बताई गई।
यह मामला DDA के 'इंटरैक्टिव डिस्पोज़ल ऑफ़ लैंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम' (IDLI) पोर्टल के काम न करने से जुड़ा है, जो 2 जनवरी से उपलब्ध नहीं है, जिससे प्रॉपर्टी मालिक कन्वर्ज़न के लिए आवेदन जमा नहीं कर पा रहे हैं।
कोर्ट ने देखा कि 2020 और 2026 के बीच कन्वर्ज़न (बदलाव) के लिए 1,373 आवेदन पेंडिंग थे, और DDA पहले ही कन्वर्ज़न चार्ज के तौर पर लगभग 155.06 करोड़ रुपये जमा कर चुका था। इन आवेदनों में से 308 को मंज़ूरी मिल गई थी, लेकिन कन्वेयंस डीड (स्वामित्व हस्तांतरण दस्तावेज़) तैयार नहीं किए गए।
अधिकारियों के रवैये से बेंच संतुष्ट नहीं थी; उसने पाया कि बार-बार मौका मिलने के बावजूद वे पॉलिसी को अंतिम रूप देने में नाकाम रहे।
कोर्ट ने आदेश दिया,
"न्याय के हित में और यह देखते हुए कि DDA पहले ही 155.06 करोड़ रुपये जमा कर चुका है, यह कोर्ट उचित समझता है कि प्रॉपर्टी को लीज़होल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने के सभी पेंडिंग आवेदनों पर DDA उसी पॉलिसी के तहत कार्रवाई करे, जो आवेदन दाखिल करने की तारीख को लागू थी।"
कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को तय की है। MoHUA के सेक्रेटरी और DDA के वाइस-चेयरमैन को अगली सुनवाई के दौरान मौजूद रहने का निर्देश दिया गया।
ये निर्देश कई मामलों में दिए गए, जिनमें DDA द्वारा दायर अवमानना अपील और प्रॉपर्टी को लीज़होल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने में देरी से जुड़ी याचिकाएं शामिल हैं।
Case Title : DELHI DEVELOPMENT AUTHORITY v. MALA SAHNI SETH & ANR And other connected matters

