वकीलों को WhatsApp अकाउंट बैन और डेटा नुकसान की शिकायत: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपीलीय पैनल से संपर्क करने का निर्देश दिया

Shahadat

8 April 2026 10:27 AM IST

  • वकीलों को WhatsApp अकाउंट बैन और डेटा नुकसान की शिकायत: दिल्ली हाईकोर्ट ने अपीलीय पैनल से संपर्क करने का निर्देश दिया

    दिल्ली हाईकोर्ट ने WhatsApp अकाउंट बैन से जुड़ी याचिकाओं के समूह को निपटाते हुए याचिकाकर्ताओं को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत कानूनी उपाय का लाभ उठाने का निर्देश दिया।

    जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि IT Rules के नियम 3A के तहत शिकायत निवारण का प्रभावी सिस्टम उपलब्ध है, जो शिकायत अपीलीय समिति के समक्ष अपील का प्रावधान करता है।

    ये याचिकाएं प्रैक्टिस करने वाले वकीलों— दीपक कंसल, डॉ. आदिश सी अग्रवाल और रोहित पांडे ने दायर की थीं, जिन्होंने अपने WhatsApp अकाउंट बैन किए जाने को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान, WhatsApp ने कोर्ट को बताया कि उसकी नीतिगत दिशानिर्देशों के अनुसार, तीनों ही मामलों में बैन पहले ही हटा दिए गए।

    हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि जहां मैसेजिंग सेवाओं तक पहुंच बहाल कर दी गई, वहीं उनके अकाउंट में पहले से जमा डेटा तक उनकी पहुंच अभी भी नहीं है, जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है।

    इन दलीलों पर गौर करते हुए कोर्ट ने कहा,

    "याचिकाकर्ताओं की यह दलील सही हो सकती है कि उनकी शिकायत का पूरी तरह से निवारण नहीं हुआ।"

    हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि इस शिकायत पर मौजूदा नियमों और विनियमों के अनुसार अपीलीय समिति द्वारा ही विचार किया जाएगा।

    कोर्ट ने कहा,

    "सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 ['नियम'] का नियम 3A अपीलीय समिति द्वारा शिकायत निवारण तंत्र का प्रावधान करता है... यदि याचिकाकर्ताओं की शिकायत अभी भी बनी रहती है तो उसका निवारण संबंधित अपीलीय समिति द्वारा ही किया जाएगा।"

    इस मामले में रविंदर बनाम भारत संघ (2025) मामले का हवाला दिया गया, जिसमें हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने इस दलील को खारिज कर दिया कि नियम 3A के तहत निर्धारित सिस्टम शिकायत के निवारण के लिए कोई प्रभावी उपाय प्रदान नहीं करता है।

    अतः, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को शिकायत अपीलीय समिति से संपर्क करने की स्वतंत्रता प्रदान की, जो 30 दिनों के भीतर इस पर अपना निर्णय लेगी।

    Case title: Reepak Kansal v. UoI

    Next Story