जंतर-मंतर प्रदर्शन: सार्वजनिक जगह पर निजता का दावा विडंबनापूर्ण, दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र का पक्ष

Amir Ahmad

24 July 2026 5:34 PM IST

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन: सार्वजनिक जगह पर निजता का दावा विडंबनापूर्ण, दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र का पक्ष

    जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की वीडियो रिकॉर्डिंग और कथित निगरानी को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा कि हर प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग कानून-व्यवस्था बनाए रखने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होती है।

    केंद्र ने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थान पर निजता का दावा कुछ हद तक विडंबनापूर्ण है।

    चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जंतर-मंतर पर होने वाले हर प्रदर्शन की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती है और यह केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से होता है, न कि किसी की जासूसी या निगरानी के लिए।

    उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान कोई अप्रिय घटना हो जाए या कोई बाहरी व्यक्ति आकर गड़बड़ी करे तो सरकार के पास उसकी पहचान और जांच के लिए आवश्यक व्यवस्था होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है लेकिन यह पूर्ण अधिकार नहीं है और वैध सरकारी उद्देश्य होने पर इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट नंदिता राव ने सुप्रीम कोर्ट के के. एस. पुट्टस्वामी फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों को भी निजता का अधिकार प्राप्त है।

    उन्होंने दलील दी कि इस अधिकार पर कोई भी प्रतिबंध तभी लगाया जा सकता है, जब वह कानून के अनुरूप हो उसका वैध सरकारी उद्देश्य हो और वह अनुपातिक हो।

    नंदिता राव ने आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक का भी इस्तेमाल कर रही है।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की निगरानी से शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों, विशेषकर छात्राओं में भय का माहौल पैदा हो सकता है।

    उन्होंने अदालत से कहा कि सरकार की मौजूदा प्रक्रिया में रिकॉर्ड किए गए वीडियो और अन्य आंकड़ों की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

    उन्होंने सवाल उठाया कि इन रिकॉर्डिंग को कहां और कितने समय तक सुरक्षित रखा जाता है तथा इनके दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था है।

    इस पर सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि प्रदर्शनकारी स्वयं भी अपने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थान पर होने वाली रिकॉर्डिंग को निजता का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता।

    हालांकि याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि आम नागरिक द्वारा वीडियो बनाने और राज्य द्वारा व्यवस्थित रूप से रिकॉर्डिंग करने में बड़ा अंतर है।

    उनका कहना था कि यदि सरकार इस तरह का डेटा एकत्र करती है तो उसके उपयोग और संरक्षण के लिए स्पष्ट कानूनी प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था होना आवश्यक है।

    दोनों पक्षों की दलीलें पूरी नहीं हो सकीं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि मामले पर विचार करने के लिए उसे समय चाहिए।

    अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।

    यह जनहित याचिका जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने दायर की।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों की लगातार फोटोग्राफी, वीडियो रिकॉर्डिंग और निगरानी की जा रही है।

    याचिका के अनुसार यह निगरानी केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदर्शनकारियों की रोजमर्रा की गतिविधियों को भी रिकॉर्ड किया जा रहा है, जिससे उनके मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

    Next Story