दिल्ली हाईकोर्ट ने अमिताभ बच्चन के 'पर्सनैलिटी राइट्स' से जुड़े मुकदमे में कई प्रतिवादियों के खिलाफ फैसला सुनाया
Shahadat
6 Nov 2026 10:24 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड एक्टर अमिताभ बच्चन द्वारा कई प्रतिवादियों के खिलाफ दायर 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व अधिकारों) से जुड़े मुकदमे में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने प्रतिवादियों को अमिताभ बच्चन के नाम, तस्वीर, आवाज़, हुबहू रूप और उनके व्यक्तित्व के अन्य पहलुओं का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल करने से रोक दिया।
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 05 नवंबर को यह आदेश पारित किया। अमिताभ बच्चन ने अपने 'पब्लिसिटी राइट्स' (प्रचार अधिकारों) के दुरुपयोग और 'पासिंग ऑफ' (गलत तरीके से खुद को उनसे जुड़ा बताने) का आरोप लगाते हुए यह मुकदमा दायर किया था और हर्जाने की मांग की थी।
कोर्ट ने यह फैसला उन चार प्रतिवादियों के खिलाफ सुनाया जिन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ समझौता किया था, और उन चार अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ भी दिया जो कोर्ट में पेश नहीं हुए।
यह फैसला अज्ञात व्यक्तियों (जिन्हें कानूनी भाषा में 'जॉन डो' कहा जाता है) पर भी लागू होता है।
यह मुकदमा कई ऐसे व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ दायर किया गया, जिन पर व्यावसायिक लाभ के लिए अमिताभ बच्चन के व्यक्तित्व का इस्तेमाल करने का आरोप था। इनमें "अमिताभ बच्चन वीडियो कॉल" नाम का एक मोबाइल एप्लिकेशन, व्हाट्सएप संदेशों के जरिए फैलाई जा रही 'कौन बनेगा करोड़पति' लॉटरी, उनकी तस्वीर वाली सामान्य ज्ञान (GK) क्विज़ बुक, और उनकी तस्वीरों वाली टी-शर्ट व पोस्टर शामिल थे।
एक्टर ने उन वेबसाइटों के डोमेन नाम पंजीकृत कराने वालों को भी मुकदमे में पक्षकार बनाया था, जिनके नाम में उनका (अमिताभ बच्चन का) नाम शामिल था।
कोर्ट ने पाया कि प्रतिवादी 1, 3, 5 और 8 ने अमिताभ बच्चन के साथ विवाद सुलझा लिया है और उनके 'पब्लिसिटी राइट्स' (प्रचार अधिकारों) तथा निजता का अधिकार स्वीकार कर लिया।
समझौते के तहत प्रतिवादियों ने यह वचन दिया कि वे अमिताभ बच्चन की स्पष्ट अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर, आवाज़, हुबहू रूप या उनके व्यक्तित्व के किसी अन्य पहलू का इस्तेमाल नहीं करेंगे।
कोर्ट ने माना कि यह समझौता कानूनी रूप से वैध है, स्वेच्छा से किया गया और इसे 'कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर' (CPC) के आदेश XXIII नियम 3 के तहत एक डिक्री (फैसले) में शामिल किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा,
"यह समझौता बिना किसी डर या दबाव के किया गया। ऐसा लगता है कि सभी पक्ष अपनी मर्जी से इसमें शामिल हुए।"
इसके अलावा, कोर्ट ने प्रतिवादी 2, 4, 6 और 9 के खिलाफ भी CPC के आदेश VIII नियम 10 के तहत फैसला सुनाया, क्योंकि समन मिलने के बावजूद वे न तो कोर्ट में पेश हुए और न ही अपना लिखित जवाब दाखिल किया।
जस्टिस कौरव ने कहा कि इस कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल बिना सोचे-समझे (यांत्रिक रूप से) नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने पाया कि इस मामले में तथ्यों से जुड़ा कोई ऐसा विवाद नहीं है, जिसके लिए ट्रायल (मुकदमे की पूरी सुनवाई) की आवश्यकता हो।
अदालत ने यह भी माना कि बच्चन की सहमति के बिना, व्यावसायिक लाभ के लिए उनके नाम और तस्वीरों का अनधिकृत इस्तेमाल, गलत तरीके से यह संकेत देता है कि वे इसका समर्थन कर रहे हैं।
अदालत ने अज्ञात उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ भी आदेश लागू किया। अदालत ने पाया कि शिकायत से पता चलता है कि वेबसाइटों, एप्लिकेशन, पोस्टरों और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए बच्चन के व्यक्तित्व का लगातार और अज्ञात रूप से दुरुपयोग किया जा रहा है।
अदालत ने बच्चन को यह छूट दी कि यदि भविष्य में कोई नया मामला (कॉज़ ऑफ़ एक्शन) बनता है, तो वे नई कानूनी कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।
CITATION : AMITABH BACHCHAN v. RAJAT NEGI & ORS

