लिव-इन पार्टनर की हत्या, परिवार को बताए बिना शव का अंतिम संस्कार: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

Amir Ahmad

8 Sept 2026 3:32 PM IST

  • लिव-इन पार्टनर की हत्या, परिवार को बताए बिना शव का अंतिम संस्कार: दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से किया इनकार

    दिल्ली हाईकोर्ट ने लिव-इन पार्टनर की हत्या करने और उसके परिवार को सूचना दिए बिना शव का अंतिम संस्कार करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत देने से इनकार किया। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से संकेत मिलता है कि आरोपी ने महिला की मौत का कारण बनने के साथ-साथ उसके रिश्तेदारों को गलत जानकारी दी और पुलिस को भी गुमराह किया, जिसके चलते FIR दर्ज करने में देरी हुई।

    जस्टिस मधु जैन ने संदीप कुमार की जमानत याचिका खारिज की। आरोपी 22 अप्रैल 2022 से न्यायिक हिरासत में है। मामला फर्श बाजार थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत दर्ज FIR से जुड़ा है।

    अभियोजन के अनुसार मृतका 4 मई 2021 से संदीप कुमार के साथ रह रही थी। 14-15 अप्रैल 2022 की दरम्यानी रात उसकी मौत हो गई। पुलिस का आरोप है कि कुमार ने 15 अप्रैल को उसके शव का निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार किया लेकिन उसके मायके वालों को इसकी सूचना नहीं दी। शव का मेडिकल टेस्ट या पोस्टमार्टम भी नहीं कराया गया। बाद में मृतका के पिता की शिकायत पर FIR दर्ज की गई।

    जमानत की मांग करते हुए आरोपी के वकील ने अदालत को बताया कि कुमार करीब चार साल से हिरासत में है और अभियोजन के 26 गवाहों में से अब तक केवल चार की गवाही हुई। दलील दी गई कि मुकदमे में हुई देरी के लिए आरोपी जिम्मेदार नहीं है।

    बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि कुमार ने अपने परिवार के सदस्यों को महिला की मौत के बारे में जानकारी दी थी और अंतिम संस्कार किसी सुनसान जगह पर नहीं बल्कि निगम बोध घाट पर किया गया। अदालत को यह भी बताया गया कि मौत से एक दिन पहले कुमार महिला को डॉक्टर के पास लेकर गया और जांच अधिकारी ने डॉक्टर का बयान भी दर्ज किया।

    वहीं अभियोजन ने जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि कुमार ने न तो महिला के परिवार को उसकी मौत की सही जानकारी दी और न ही उन्हें घटनाक्रम के बारे में सच बताया। इसके बजाय उसने कथित तौर पर यह झूठ कहा कि महिला घर छोड़कर चली गई।

    राज्य की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि कुमार ने अंतिम संस्कार स्थल पर गलत जानकारी दी और दावा किया कि महिला की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है। इसके बावजूद उसने न तो महिला को डॉक्टर के पास ले जाने की कोशिश की और न ही उसकी मौत वाली जगह पर किसी डॉक्टर को बुलाया।

    अभियोजन ने कहा कि आरोपी ने पुलिस को सूचना देने से पहले ही शव का अंतिम संस्कार करा दिया और इसके लिए किसी तरह की मेडिकल टेस्ट भी नहीं कराई।

    मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा,

    “रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री प्रथम दृष्टया संकेत देती है कि आरोपी ने न केवल मृतका की मौत का कारण बना बल्कि उसके रिश्तेदारों को गलत जानकारी दी और पुलिस को गुमराह किया, जिसके परिणामस्वरूप FIR दर्ज करने में देरी हुई।”

    जस्टिस मधु जैन ने अपराध की गंभीरता और आरोपी पर लगाए गए आरोपों को देखते हुए कहा कि इस स्तर पर जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने संदीप कुमार की जमानत याचिका खारिज की।

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