पत्नी की हत्या कर शव के टुकड़े सेप्टिक टैंक में फेंकने के आरोपी को जमानत नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- अपराध का वीभत्स तरीका नजरअंदाज नहीं कर सकते
Amir Ahmad
21 Aug 2026 5:46 PM IST

पत्नी की हत्या कर उसके शव के टुकड़े करने और उन्हें सेप्टिक टैंक में फेंकने के आरोपी व्यक्ति को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देने से इनकार किया।
हाईकोर्ट ने कहा कि जमानत पर फैसला करते समय हत्या के वीभत्स तरीके को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जस्टिस गिरीश कठपालिया ने आशु पाल की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। मामला प्रेम नगर थाने में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 201 और 34 के तहत दर्ज FIR से जुड़ा है।
अभियोजन के अनुसार 22 फरवरी 2019 को पाल थाने पहुंचा और कथित तौर पर बताया कि उसने अपनी पत्नी की हत्या की। उसने शव के टुकड़े कर उन्हें सेप्टिक टैंक में डाल दिया था। इसी दौरान पूछताछ के बीच मृतका के भाई की ओर से पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना मिली कि उसकी बहन की हत्या कर दी गई और उसका शव सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ।
मृतका के भाई ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि तीन बेटियों को जन्म देने के बाद पाल और उसके परिवार के सदस्य महिला को प्रताड़ित करते थे और दहेज की मांग करते थे।
अभियोजन का यह भी आरोप था कि पाल ने मृतका की मां को फोन कर बताया था कि उसने अपनी पत्नी की हत्या की है। इसके बाद जब मृतका का भाई आरोपी के घर पहुंचा तो वहां कथित तौर पर खून के निशान मिले और सेप्टिक टैंक में महिला का शव मिला।
जमानत की मांग करते हुए आरोपी के वकील ने मृतका की मां और भाई की गवाही में महत्वपूर्ण विरोधाभास होने का दावा किया। यह भी दलील दी गई कि आरोपी कभी अपराध कबूल करने के लिए थाने नहीं गया। बचाव पक्ष ने मुकदमे की धीमी गति को भी जमानत का आधार बताया।
इसके विपरीत अभियोजन ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई धीमी गति से नहीं चल रही है और आरोपी के खिलाफ लगे गंभीर आरोप उसे जमानत दिए जाने से रोकते हैं।
अभियोजन ने यह भी बताया कि शव को काटने में इस्तेमाल किए जाने वाला कथित खून से सना हथियार, मृतका के कपड़े और आभूषण समेत अन्य सामग्री बरामद की गई है और उनका विधि-विज्ञान जांच भी कराया गया।
जमानत याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे में देरी जमानत देने का एक आधार हो सकती है लेकिन यह एकमात्र आधार नहीं है।
जस्टिस गिरीश कठपालिया ने कहा कि जमानत देने या खारिज करने पर विचार करते समय अदालत उस वीभत्स तरीके से आंखें नहीं मूंद सकती, जिसमें महिला की हत्या की गई और उसके बाद शव के टुकड़े कर उन्हें सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया।
अदालत ने कहा,
“इन परिस्थितियों को देखते हुए मुझे आरोपी को जमानत देने के लिए यह उपयुक्त मामला नहीं लगता। इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।”


